लखनऊ में गोमती का कहर! फैजुल्लागंज में घरों तक पहुंचा पानी, नाव बनी सहारा; हजारों परिवारों के सामने पलायन की मजबूरी

लखनऊ: गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। कई दिनों से लगातार जलभराव के कारण कॉलोनियों, गलियों और घरों में पानी घुसा है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोगों को घरों से बाहर निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। अलग-अलग ग्राउंड रिपोर्टों में बड़ी संख्या में घरों और परिवारों के प्रभावित होने की बात सामने आई है, जबकि कई परिवार सुरक्षित स्थानों और रिश्तेदारों के यहां जा चुके हैं।

फैजुल्लागंज के मिल्लत नगर, जैनब मस्जिद क्षेत्र, राम विहार कॉलोनी, मामा कॉलोनी, दाऊदनगर, चौबे की डेयरी और लौहरामऊ समेत कई इलाकों में पानी भरा हुआ है। कई गलियों में घुटनों तक पानी है, जबकि निचले इलाकों में पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है। एक रिपोर्ट में 500 से ज्यादा परिवारों के प्रभावित होने की बात कही गई है, जबकि दूसरी ग्राउंड रिपोर्ट में करीब 40 हजार घरों में पानी भरने और करीब 3 लाख लोगों के प्रभावित होने का दावा किया गया है।

कई दिनों से घरों में कैद जिंदगी, बच्चों और बुजुर्गों की सबसे ज्यादा चिंता

जलभराव के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार घरों में फंसे हैं और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान जुटाना भी मुश्किल हो गया है। कुछ परिवार घर खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर जा चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दिनों से इसी तरह पानी के बीच रहने की मजबूरी बनी हुई है।

कौशल्या देवी ने बताया कि घर के आसपास पानी भरने से खाने-पीने की समस्या हो रही है और बाहर निकलना मुश्किल है। ममता मिश्रा के मुताबिक, हालात लगातार खराब होने के कारण उनका परिवार अब घर खाली कर सुरक्षित जगह जाने को मजबूर है। वहीं देवेश ने बताया कि पानी इतना अधिक है कि पैदल निकलना संभव नहीं है और लोगों को नाव के जरिए बाहर जाना पड़ रहा है।

पानी के बीच सबसे बड़ा संकट पीने के पानी का

जलभराव से घिरे परिवारों के सामने खाने-पीने के सामान के साथ पीने के पानी की भी गंभीर समस्या है। ग्राउंड रिपोर्ट में प्रभावित लोगों ने बताया कि कई परिवारों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। प्रशासन की ओर से नावों के जरिए जरूरत का सामान और पानी पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन प्रभावित लोगों का कहना है कि जरूरत के हिसाब से सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं।

बिजली की आपूर्ति बंद होने से परेशानी और बढ़ गई है। सुरक्षा के मद्देनजर जलभराव वाले इलाकों में बिजली बंद की गई है। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर पानी में डूबने और करंट फैलने के खतरे के चलते फैजुल्लागंज पावर हाउस ने बिजली आपूर्ति ठप की है। बिजली नहीं होने से पानी की मोटर भी नहीं चल पा रही है।

घर छोड़ रहे लोग, सामान और मवेशियों को लेकर भी चिंता

बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में परिवार घर खाली कर चुके हैं। कुछ लोग रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं, जबकि कई सुरक्षित स्थानों पर शरण ले रहे हैं। वहीं कुछ परिवार घर और सामान की सुरक्षा की चिंता के कारण अभी भी वहीं रुके हुए हैं। ग्राउंड रिपोर्ट में पानी के बीच लोगों को घर का सामान और मवेशियों के बच्चों को कंधे पर लेकर निकलते हुए भी देखा गया।

एक अन्य रिपोर्ट में प्रभावित लोगों ने रात के समय घरों में चोरी की आशंका भी जताई है। लोगों का कहना है कि जो परिवार घर छोड़कर जा रहे हैं, उनके खाली मकानों को लेकर चिंता बनी हुई है। कुछ इलाकों में गलियों के कुत्तों के छतों पर चढ़ने और बच्चों तथा मवेशियों के भूखे रहने की बात भी सामने आई है।

नाव बनी जिंदगी की सबसे बड़ी जरूरत

फैजुल्लागंज के कई इलाकों में राहत और बचाव के लिए नावें लगाई गई हैं। प्रशासन के मुताबिक तीन दर्जन से ज्यादा नावें प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त नावें लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इन्हीं नावों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ भोजन, पीने का पानी और जरूरी सामान भी पहुंचाया जा रहा है।

हालांकि, एक अन्य ग्राउंड रिपोर्ट में कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि नाव से बाहर निकलने के लिए उनसे प्रति व्यक्ति 100 से 150 रुपये लिए जा रहे हैं। नाव चलाने वाले एक व्यक्ति ने यह भी बताया कि उन्हें काम पर लगाया गया था और भुगतान को लेकर भी परेशानी है।

गंदे पानी के बीच बीमारी और जहरीले जीवों का खतरा

कई दिनों से पानी जमा रहने के कारण बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों को घरों में सीलन, गंदगी और दूषित पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। बच्चों को लेकर परिवारों की चिंता सबसे ज्यादा है। इसके अलावा सांप और दूसरे जहरीले जीवों का खतरा भी बढ़ने की बात सामने आई है।

स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं। स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं और मोबाइल मेडिकल यूनिट के जरिए दवाएं, क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। नगर निगम की ओर से फॉगिंग और कीटनाशक का छिड़काव भी कराया जा रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

राहत के साथ इंसानियत की मिसाल, नाव लेकर लोगों को बचा रहे गणेश

मुश्किल हालात के बीच स्थानीय लोग भी राहत कार्य में जुटे हैं। दाऊदनगर निवासी गणेश नाव चलाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। उन्हें नाव चलाना आता है और वह बिना किसी लाभ की उम्मीद के अपनी इच्छा से श्रमदान कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोगों की सबसे बड़ी जरूरत इस समय खाना और पीने का पानी है।

वहीं ममता मिश्रा ने बताया कि बिंदु बोरा की ओर से शुक्रवार को प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री बांटी गई थी। घर-घर जाकर खाद्य सामग्री और पानी की बोतलें दी गईं। इससे उन परिवारों को कुछ राहत मिली, जिनके लिए पानी के बीच घर से निकलकर सामान खरीदना मुश्किल था।

प्रशासन ने बनाए राहत शिविर, डीएम बोले- अगले 24 घंटे अहम

प्रशासन का कहना है कि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, भोजन-पानी उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। राहत शिविर भी बनाए गए हैं, जहां प्रभावित परिवारों के ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्था की गई है।

लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर के मुताबिक, अगले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। गोमती का जलस्तर अभी और बढ़ सकता है, इसके बाद इसमें कमी आने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पानी कम होने के बाद भी फैजुल्लागंज और आसपास के इलाकों को पूरी तरह सामान्य होने में करीब एक सप्ताह लग सकता है।

हर साल की जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान तलाशने की तैयारी

फैजुल्लागंज में हर साल सामने आने वाली जलभराव की समस्या को देखते हुए स्थायी समाधान की दिशा में भी तैयारी की जा रही है। लखनऊ विकास प्राधिकरण की ओर से गोमती आईआईएम रोड से पक्का पुल तक बंधा बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

फिलहाल फैजुल्लागंज और आसपास के इलाकों में लोगों की जिंदगी पानी के बीच अटकी हुई है। कहीं नाव से लोग सुरक्षित जगह पहुंच रहे हैं, कहीं परिवार घर छोड़ने को मजबूर हैं तो कहीं लोग अपने घर और सामान की सुरक्षा के लिए पानी के बीच ही रुके हुए हैं। प्रशासन के सामने तत्काल राहत के साथ जलभराव से स्थायी निजात दिलाने की चुनौती भी बनी हुई है।

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