नेपाल जलप्रलय में तबाही का खौफनाक आंकड़ा, मृतकों की संख्या 1377 पहुंची; 5000 से ज्यादा लोग अब भी लापता

काठमांडू: नेपाल में ग्लेशियर ढहने के बाद आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1377 हो गई है, जबकि 5000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। 26 अगस्त को आई बाढ़ ने नेपाल के नौ जिलों को बुरी तरह प्रभावित किया था। मलबे और कीचड़ के बीच लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है।

अधिकारियों के मुताबिक, आपदा के बाद अब तक 13656 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। वहीं 5130 लोगों के अभी भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। बचाव दल प्रभावित इलाकों में मलबे और कीचड़ के बीच तलाश अभियान चला रहे हैं।

भूकंप ने भी बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

बाढ़ की तबाही के बीच नेपाल के मस्टांग जिले में आए भूकंप ने भी लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। नेपाली कांग्रेस के सांसद योगेश गऊचान ने गुरुवार को सरकार से भूकंप प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने की अपील की।

मंगलवार रात काठमांडू से करीब 350 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित मस्टांग जिले में आठ बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप के कारण करीब 300 घरों और स्कूलों की इमारतों को नुकसान पहुंचा है।

एलपीजी की कमी से आम जनजीवन प्रभावित

नेपाल में आपदा के बीच एलपीजी गैस की कमी ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। गैस की किल्लत का असर छात्रों पर भी पड़ रहा है और इसे लेकर उनमें नाराजगी बढ़ रही है।

गुरुवार को छात्रों ने एलपीजी की कमी के विरोध में रत्ना राज्य लक्ष्मी कैंपस के प्रवेशद्वार पर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। उन्होंने सड़क पर अस्थायी रसोई बनाकर खाना पकाया।

सड़क पर बनाया खाना, 40 लोगों ने साथ किया भोजन

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कैंपस के गेट पर चावल और गुंडरुक-आलू की सब्जी बनाई। इसके बाद करीब 40 लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया।

छात्रों का यह प्रदर्शन एलपीजी गैस की कमी से पैदा हुई समस्या की ओर ध्यान खींचने के लिए किया गया। एक ओर बाढ़ और भूकंप से प्रभावित लोगों के लिए राहत एवं बचाव अभियान जारी है, वहीं दूसरी ओर ईंधन की कमी ने सामान्य जनजीवन को भी प्रभावित कर दिया है।

 

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