लखनऊ: बिजली विभाग में एक जूनियर इंजीनियर को गलत तरीके से हटाने और अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद जांच रिपोर्ट पेश नहीं करने का मामला अब वरिष्ठ अधिकारी के लिए भारी पड़ गया है। अमौसी जोन के चीफ इंजीनियर रामकुमार पर अदालत ने आदेश की अवहेलना के मामले में पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला एक जूनियर इंजीनियर के तबादले और उससे जुड़ी जांच रिपोर्ट न्यायालय में पेश नहीं किए जाने से जुड़ा है। अदालत के आदेश के बाद बिजली विभाग में हलचल तेज हो गई है और चीफ इंजीनियर कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रहे हैं।
मामले की शुरुआत नवंबर 2025 में लेसा की नई वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के दौरान हुई। इसी समय दुबग्गा निवासी शहजाद अली ने अपनी फर्म मेसर्स एसए के नाम से 20 केवीए क्षमता का औद्योगिक बिजली कनेक्शन लिया था। दुबग्गा के तत्कालीन जेई आरके चौधरी ने कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद रिपोर्ट लगाई, जिसके आधार पर कनेक्शन स्वीकृत हो गया। उपभोक्ता के परिसर में मीटर लगा दिया गया, लेकिन बिजली आपूर्ति शुरू नहीं की गई।
शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंची तो मामले की विभागीय जांच शुरू हुई। जांच में तत्कालीन जेई आरके चौधरी की लापरवाही सामने आई। इस बीच वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के कारण सबस्टेशन के जेई बदल चुके थे। इसके बावजूद अधिशासी अभियंता (कलेक्शन) नीरज ने नए जेई नितिन चौधरी को जिम्मेदार ठहरा दिया। तत्कालीन मुख्य अभियंता महफूज आलम ने नितिन चौधरी को हटाने की संस्तुति कर दी और इसके बाद उनका रातों-रात गोरखपुर तबादला कर दिया गया।
निर्दोष जेई ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
तबादले के बाद नितिन चौधरी ने आला अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि जिस समय बिजली कनेक्शन स्वीकृत किया गया था, उस समय वह वहां तैनात ही नहीं थे। मामला बढ़ने पर विभाग ने बाद में मूल आरोपी जेई आरके चौधरी को भी हटाकर गोरखपुर भेज दिया। इसके बावजूद नितिन चौधरी ने अपना तबादला रद्द कराने की मांग जारी रखी।
विभागीय अधिकारियों से सुनवाई नहीं होने पर नितिन चौधरी ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने अमौसी जोन के चीफ इंजीनियर को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश दिया। इसके लिए दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर उसकी रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करने को कहा गया।
जांच हुई, लेकिन अदालत तक नहीं पहुंची रिपोर्ट
चीफ इंजीनियर ने अधीक्षण अभियंता (वाणिज्य) के नेतृत्व में दो सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच कराई। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी, लेकिन उसे मध्यांचल निगम मुख्यालय भेज दिया गया। इसके बाद रिपोर्ट वहीं लंबित रही और अदालत के समक्ष पेश नहीं की गई।
अदालत ने इसे अपने स्पष्ट आदेश की अवहेलना माना। इसी आधार पर चीफ इंजीनियर को अवमानना का दोषी करार देते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत के इस आदेश के बाद विभागीय स्तर पर भी मामले को लेकर कार्रवाई तेज हो गई है।
रिपोर्ट समय पर अदालत क्यों नहीं पहुंची, विभाग कर रहा पड़ताल
लेसा के अमौसी जोन के मुख्य अभियंता रामकुमार ने बताया कि अदालत के निर्देश पर दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई थी और उसकी रिपोर्ट निगम को भेज दी गई थी। उन्होंने कहा कि अदालत में निगम के अधिवक्ता विभाग का पक्ष रख रहे हैं। रिपोर्ट समय पर न्यायालय तक क्यों नहीं पहुंच सकी, इसकी जांच की जा रही है।
वहीं, इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही के लिए मुख्य अभियंता कार्यालय के बाबू बीके यादव को आरोपपत्र दिया गया है। उन पर आरोप है कि जांच रिपोर्ट की जो प्रति आरोपी जेई को उपलब्ध कराई जानी थी, वह समय से नहीं दी गई।
