22 साल बाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कुंवर सिंह को मिलेगी रुकी पेंशन-ग्रेच्युटी, 7% ब्याज भी देने का आदेश

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मैनपुरी निवासी कुंवर सिंह की पिछले सात साल से रोकी गई पेंशन और ग्रेच्युटी बहाल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने संबंधित विभाग को सेवानिवृत्ति की तारीख से भुगतान होने तक 7 फीसदी साधारण ब्याज देने का भी निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

कुंवर सिंह के खिलाफ वर्ष 2003 में क्राइम नंबर 174 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 409 में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद 18 जून 2003 को अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें उन्हें दोषमुक्त बताया गया था। इसके बावजूद 16 सितंबर 2019 के आदेश के जरिए उनकी पेंशन और ग्रेच्युटी रोक दी गई। विभाग की ओर से कहा गया था कि आपराधिक मामले का निपटारा होने के बाद ही ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा।

अदालत में रिकॉर्ड तक नहीं मिल सका

राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया जा सका कि पुलिस की अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ कोई आपत्ति याचिका दाखिल हुई थी या नहीं। यह भी स्पष्ट नहीं हुआ कि अदालत ने ऐसी किसी याचिका को खारिज किया था या नहीं। मैनपुरी के थाना कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक ने 27 मार्च 2026 को पत्र के जरिए बताया कि संबंधित आपराधिक मामले के रिकॉर्ड अदालत में उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं और उनकी तलाश की जा रही है।

यह भी सामने आया कि पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार हुई थी या खारिज, इसकी जानकारी संबंधित विभाग को कभी नहीं दी गई।

हाईकोर्ट ने 2019 का आदेश किया रद्द

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने कहा कि अंतिम रिपोर्ट दाखिल हुए 22 साल से अधिक समय बीत चुका है और पुलिस की विवेचना में याचिकाकर्ता को क्लीनचिट मिल चुकी है। ऐसे में केवल आपराधिक मामले के आधार पर उनकी पेंशन और ग्रेच्युटी रोकना उचित नहीं है।

कोर्ट ने 16 सितंबर 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत कुंवर सिंह की पेंशन और ग्रेच्युटी रोकी गई थी। अदालत ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को पेंशन और ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाए। इसके साथ ही सेवानिवृत्ति की तारीख से वास्तविक भुगतान की तारीख तक 7 फीसदी साधारण ब्याज भी देने का आदेश दिया गया है।

 

Related posts