ब्रेन हेल्थ को न करें नजरअंदाज, एक्सपर्ट से जानें क्यों दिल जितनी जरूरी है दिमाग की सेहत

नोएडा: जिस तरह लोग दिल को स्वस्थ रखने के लिए खान-पान, व्यायाम और नियमित जांच पर ध्यान देते हैं, उसी तरह दिमाग की सेहत का भी रोजाना ख्याल रखना जरूरी है। स्वस्थ दिल शरीर को जीवन देता है, जबकि स्वस्थ दिमाग हमें सोचने, समझने, महसूस करने और यादों को संजोकर रखने की क्षमता देता है। इसके बावजूद ज्यादातर लोग मस्तिष्क की सेहत पर तब ध्यान देते हैं, जब कोई गंभीर परेशानी सामने आ जाती है।

नोएडा स्थित फोर्टिस अस्पताल की पार्किंसंस रोग एवं मूवमेंट डिसऑर्डर्स विशेषज्ञ, वरिष्ठ सलाहकार न्यूरोलॉजिस्ट और क्लिनिकल लीड डॉक्टर नेहा पंडिता के मुताबिक, कई मरीज शुरुआती लक्षणों को उम्र बढ़ने का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ लोगों को लगातार चीजें भूलने, चलते समय संतुलन बिगड़ने या हाथों में हल्का कंपन महसूस होने लगता है, लेकिन वे इसे गंभीरता से नहीं लेते।

दिल को नुकसान पहुंचाने वाली आदतें दिमाग पर भी असर डालती हैं

दिल और दिमाग के बीच गहरा संबंध है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ रक्तचाप, अनियंत्रित रक्त शर्करा, अधिक कोलेस्ट्रॉल और धूम्रपान जैसी आदतें सिर्फ हृदय को ही नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा सकती हैं।

इन कारणों से स्ट्रोक और याददाश्त से जुड़ी परेशानियों का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञ के मुताबिक, दिमाग अचानक किसी बड़ी समस्या का संकेत नहीं देता, बल्कि कई बार उससे पहले छोटे-छोटे बदलाव दिखाई देने लगते हैं। जरूरत इन संकेतों को समय रहते पहचानने की है।

बिगड़ती दिनचर्या से भी कमजोर हो सकता है दिमाग

आज की जीवनशैली में लगातार स्क्रीन के सामने रहना, सुबह उठते ही मोबाइल देखना, पर्याप्त नींद न लेना, लगातार तनाव में रहना और शारीरिक गतिविधि कम करना दिमाग की कार्यक्षमता पर असर डाल सकता है।

कई युवा मरीज ध्यान केंद्रित न कर पाने और चीजें याद न रहने की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। जांच में हमेशा कोई गंभीर बीमारी सामने नहीं आती, लेकिन उनकी दिनचर्या से पता चलता है कि दिमाग को पर्याप्त आराम और सक्रियता का संतुलन नहीं मिल रहा है।

दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली में करें बदलाव

डॉक्टर नेहा पंडिता के मुताबिक, दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए हमेशा दवा की जरूरत नहीं होती। कई मामलों में बेहतर जीवनशैली मस्तिष्क की सेहत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

रोजाना कुछ समय पैदल चलना, पर्याप्त नींद लेना, नई चीजें सीखना, किताबें पढ़ना, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना, संगीत सुनना और तनाव को नियंत्रित करना दिमाग को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। मस्तिष्क को जितना सक्रिय रखा जाता है, उसकी कार्यक्षमता को बनाए रखने में उतनी ही मदद मिलती है।

कब भूलने की समस्या को गंभीरता से लें?

हर छोटी भूल किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती। कभी चाबी रखकर भूल जाना या किसी व्यक्ति का नाम याद करने में कुछ सेकंड लगना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही है और उसका असर रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ने लगा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इसी तरह बोलने, चलने या शरीर का संतुलन बनाए रखने में बदलाव महसूस हो तो इसे केवल उम्र बढ़ने का असर मानकर टालना उचित नहीं है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहने या बढ़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

 

Related posts