लखनऊ: अलीगंज अग्निकांड के बाद ध्वस्त की गई अवैध इमारत को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने बड़ा फैसला लिया है। प्राधिकरण अब इमारत को गिराने में हुए पूरे खर्च की वसूली भवन मालिक से करेगा। इस संबंध में जल्द ही एलडीए की समिति बैठक कर खर्च का आकलन करेगी, जिसके बाद भवन स्वामी को वसूली का नोटिस जारी किया जाएगा।
समिति तय करेगी कितनी होगी वसूली
एलडीए अधिकारियों के मुताबिक ध्वस्तीकरण में आए कुल खर्च का निर्धारण एक समिति करेगी। समिति में प्रशासनिक अधिकारी, अभियंता, जोनल अधिकारी और लेखा विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। भवन के क्षेत्रफल, निर्माण की प्रकृति और ध्वस्तीकरण में लगे संसाधनों के आधार पर वसूली की राशि तय की जाएगी।
पांच लाख रुपये से अधिक हो सकता है खर्च
सूत्रों के अनुसार, ध्वस्तीकरण पर आने वाला खर्च पांच लाख रुपये से कम नहीं होने का अनुमान है। करीब 2,000 वर्गफुट के प्लॉट पर बेसमेंट सहित तीन मंजिला इमारत बनी थी, जिसका कुल निर्मित क्षेत्र लगभग 8,000 वर्गफुट बताया जा रहा है। भवन को गिराने के लिए बुलडोजर, भारी मशीनें, कर्मचारी, ट्रक और अन्य संसाधन लगाए गए थे।
एलडीए के इतिहास में पहली बार होगी वसूली
बताया जा रहा है कि यह एलडीए का पहला मामला होगा, जिसमें किसी अवैध निर्माण को ध्वस्त करने पर आए खर्च की वसूली सीधे भवन मालिक से की जाएगी। इससे पहले प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण तो कराए, लेकिन खर्च की वसूली का कदम नहीं उठाया था।
नोटिस के बाद भी नहीं तोड़ी गई थी इमारत
अलीगंज स्थित इस इमारत में 22 जून को भीषण आग लगी थी। इसके बाद एलडीए ने 10 जुलाई को भवन स्वामी को ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी करते हुए 15 दिन के भीतर स्वयं इमारत गिराने का निर्देश दिया था। नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर एलडीए खुद भवन को ध्वस्त करेगा और पूरा खर्च भवन मालिक से वसूलेगा।
25 जुलाई को एलडीए ने की थी कार्रवाई
निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी भवन मालिक ने इमारत नहीं गिराई। इसके बाद 25 जुलाई को एलडीए ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर और अन्य मशीनों की मदद से पूरी इमारत को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान मलबा हटाने के लिए ट्रकों की भी व्यवस्था की गई थी।
