30 साल बाद विधान भवन पहुंचे शरद पवार, सीएम फडणवीस और डिप्टी सीएम शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुईं सियासी अटकलें

मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार बुधवार को करीब 30 वर्ष बाद महाराष्ट्र विधानसभा परिसर स्थित विधान भवन पहुंचे। उन्होंने महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के दौरान उनकी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी मुलाकात हुई। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य की राजनीति में उनकी पार्टी के राजनीतिक रुख को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

1996 के बाद पहली बार पहुंचे विधान भवन

बताया जा रहा है कि विधानमंडल सत्र के दौरान शरद पवार की यह उपस्थिति वर्ष 1996 के बाद पहली बार रही। विधान भवन पहुंचने पर पार्टी के विधायकों और नेताओं ने उनका स्वागत किया। उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दिया।

सीमा विवाद पर हुई उच्चस्तरीय बैठक

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद से जुड़े मामले पर सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली आगामी सुनवाई के मद्देनजर राज्य की कानूनी तैयारियों और रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में कानूनी पक्ष को मजबूत करने और आगे की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श हुआ।

एकनाथ शिंदे से भी हुई शिष्टाचार मुलाकात

बैठक समाप्त होने के बाद शरद पवार ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके कार्यालय में मुलाकात की। उपमुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, शिंदे ने उनका शॉल और पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का कोई आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया गया।

बैठक में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद

उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, केंद्रीय मंत्री नारायण राणे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे और समिति के अन्य सदस्य शामिल हुए। वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुआ, जिसे लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।

क्या है महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद वर्ष 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम से जुड़ा है। उस समय बेलगावी, कारवार और निपानी सहित 865 मराठी भाषी गांव तत्कालीन मैसूर राज्य, जो अब कर्नाटक है, में शामिल कर दिए गए थे। महाराष्ट्र लगातार इसका विरोध करता रहा। वर्ष 1966 में गठित महाजन आयोग की रिपोर्ट को महाराष्ट्र ने स्वीकार नहीं किया और वर्ष 2004 में राज्य सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।

सुनवाई से पहले कानूनी तैयारी पर जोर

मामला अब कानूनी रूप से महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है। राज्य सरकार आगामी सुनवाई में भाषाई जनसंख्या और भौगोलिक आधार पर अपने पक्ष को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि सीमा विवाद से जुड़े लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण शरद पवार की मौजूदगी इस प्रक्रिया में अहम मानी जा रही है।

 

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