कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही है। पार्टी के बागी खेमे की ओर से अब दावा किया गया है कि एक और विधायक उनके साथ जुड़ गया है, जिसके बाद बागी विधायकों की संख्या 65 तक पहुंच सकती है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विधानसभा में हुई एक गोपनीय बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बागी गुट की अगुवाई कर रहे रिताब्रता बनर्जी ने संकेत दिया है कि उनके समर्थन में एक और विधायक आ चुका है। हालांकि उन्होंने संबंधित विधायक का नाम सार्वजनिक नहीं किया, जिससे सस्पेंस और गहरा गया है।
सीक्रेट मीटिंग के बाद तेज हुई अटकलें
सोमवार को विधानसभा परिसर में हुई एक मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। बताया जा रहा है कि कोलकाता पोर्ट क्षेत्र से विधायक फिरहाद हाकिम ने रिताब्रता बनर्जी से मुलाकात की थी। इसी बैठक के बाद बागी खेमे की संख्या बढ़ने का दावा सामने आया।
रिताब्रता बनर्जी ने कहा कि एक और विधायक ने उनके समर्थन में हस्ताक्षर कर दिए हैं और अब संख्या 65 तक पहुंच गई है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि नया समर्थन किस विधायक की ओर से मिला है।
कई नेताओं की मौजूदगी से बढ़ी चर्चा
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान बागी गुट के कई विधायक भी आसपास मौजूद थे। बताया जा रहा है कि कुछ अन्य नेताओं के बीच भी अलग-अलग दौर की बातचीत हुई, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला।
हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से इस मुलाकात को लेकर औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में फिलहाल यह मामला दावों और कयासों के बीच ही बना हुआ है।
58 से शुरू हुआ था बगावत का सिलसिला
तृणमूल कांग्रेस में असंतोष की यह कहानी तब शुरू हुई थी जब रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। इसके बाद बागी विधायकों की संख्या 58 बताई गई थी।
समय के साथ बागी गुट लगातार अपने समर्थन का दावा बढ़ाता रहा। पहले 64 विधायकों के समर्थन की बात कही गई और अब संख्या 65 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।
लोकसभा और राज्यसभा में भी झटके का दावा
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस को संसद में भी झटके लगने की खबरें सामने आई हैं। दावा किया जा रहा है कि पार्टी से अलग हुए कई सांसद दूसरे राजनीतिक मंच के साथ जाने का फैसला कर चुके हैं।
इसके अलावा राज्यसभा में भी कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने की चर्चाओं ने तृणमूल कांग्रेस के लिए सियासी चुनौती को और बढ़ा दिया है। हालांकि इन घटनाक्रमों पर आधिकारिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
बंगाल की राजनीति पर टिकी नजरें
विधानसभा और संसद दोनों स्तरों पर सामने आ रहे इन दावों के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि बागी गुट के दावों में कितना दम है और आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर सियासी समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
