लखनऊ: उत्तर प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सस्पेंस लगातार बना हुआ है। मऊ की घोसी, सोनभद्र की दुद्धी और बरेली की फरीदपुर सीट पर अब तक चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
घोसी सीट पर सबसे ज्यादा नजरें, 6 महीने पूरे होने के बाद भी इंतजार जारी
प्रदेश की इन तीनों सीटों में सबसे अधिक चर्चा घोसी विधानसभा सीट को लेकर है। यह सीट समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद 20 नवंबर 2025 को रिक्त हुई थी। अगले सप्ताह इस सीट के खाली हुए छह महीने पूरे हो जाएंगे, लेकिन अब तक न तो चुनाव आयोग ने अधिसूचना जारी की है और न ही उपचुनाव की तारीखों का ऐलान किया गया है।
दुद्धी और फरीदपुर सीट भी खाली, जनवरी में भेजी गई सूचना
दुद्धी विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह के निधन के बाद जनवरी 2026 में रिक्त हुई थी। वहीं बरेली की फरीदपुर सीट पर भाजपा विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल के निधन के बाद यह सीट भी खाली हो गई थी। इन दोनों सीटों की रिक्तता की जानकारी विधानसभा सचिवालय द्वारा चुनाव आयोग को जनवरी में ही भेज दी गई थी।
नियम के बावजूद देरी से बढ़ा सस्पेंस
आम तौर पर किसी विधानसभा सीट के खाली होने के बाद छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना अपेक्षित माना जाता है। ऐसे में घोसी सीट पर समय सीमा पार होने के बावजूद चुनाव कार्यक्रम घोषित न होने से राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
SIR प्रक्रिया को माना जा रहा देरी की वजह
सूत्रों के अनुसार, वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को उपचुनाव में देरी का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि आयोग ने 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी थी, लेकिन इसके बाद भी उपचुनाव को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
कानून क्या कहता है उपचुनाव पर
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 150 और 151A के तहत किसी भी सीट के रिक्त होने पर चुनाव आयोग को उपचुनाव कराना होता है। सामान्य तौर पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराने का प्रावधान है, हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में इसे टाला भी जा सकता है, जैसे विधानसभा का कार्यकाल समाप्ति के करीब होना या अन्य प्रशासनिक कारण।
विधानसभा कार्यकाल को लेकर स्थिति स्पष्ट
उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है। ऐसे में अभी एक वर्ष से अधिक समय शेष है, जिससे नियमों के अनुसार रिक्त सीटों पर उपचुनाव कराना अपेक्षित माना जा रहा है।
आयोग की चुप्पी से बढ़ी राजनीतिक बेचैनी
चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में राजनीतिक दलों के साथ-साथ मतदाताओं के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आयोग इन तीन महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कब करता है।
