कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बनी नई सरकार का पहला बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार सोमवार को होने जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार में आज 35 नए मंत्रियों को शामिल किया जाएगा। सुबह 11 बजे लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राज्य की राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। सरकार गठन के करीब 22 दिन बाद होने जा रहा यह विस्तार प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस दौरान कई नए और युवा नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह देकर बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।
युवा नेतृत्व पर दांव लगाने की तैयारी
कैबिनेट विस्तार से पहले राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों और विभिन्न दावों के अनुसार, सरकार इस बार नए और युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर सकती है। ऐसे में कई ऐसे नाम सामने आ सकते हैं जिन्हें पहली बार मंत्री पद की जिम्मेदारी मिले।
सरकार की कार्यप्रणाली को मिलेगी नई गति
मंत्रिमंडल के विस्तार को राज्य सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। नए मंत्रियों के शामिल होने से विभिन्न विभागों में जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा होने की उम्मीद है, जिससे शासन और विकास कार्यों में तेजी आ सकती है।
मुख्यमंत्री ने खुद किया ऐलान
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को मंत्रिमंडल विस्तार की औपचारिक घोषणा की थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सोमवार को पश्चिम बंगाल की जनता के मत से चुनी गई राष्ट्रवादी सरकार की पूर्ण मंत्रिपरिषद का गठन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजे 35 मंत्री शपथ लेंगे और राज्यपाल आर.एन. रवि उन्हें शपथ दिलाएंगे।
विभागों के बंटवारे पर टिकी निगाहें
हालांकि नए मंत्रियों के विभागों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ नए और युवा चेहरों को भी महत्वपूर्ण विभाग सौंपे जा सकते हैं। ऐसे में शपथ ग्रहण के बाद विभागों के आवंटन पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
चुनावी जीत के बाद पूरी होगी अहम प्रक्रिया
इस शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही चुनावी जीत के बाद राज्य सरकार की मंत्रिस्तरीय टीम के गठन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर है कि सरकार प्रशासनिक संतुलन और राजनीतिक संदेश के लिहाज से किन नेताओं को कौन-सी जिम्मेदारी सौंपती है।
