तेल रखने की जगह नहीं बची! ईरान ने कबाड़ टैंकर को बनाया तैरता गोदाम

अमित मित्तल
अमित मित्तल

ईरान इस समय अपने तेल उत्पादन और निर्यात के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नौसैनिक दबाव और सख्त निगरानी के कारण तेहरान का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालत यह हो गई है कि अब ईरान के पास कच्चा तेल रखने की जगह तेजी से खत्म हो रही है।

इस संकट से बचने के लिए ईरान ने अब 30 साल पुराने विशालकाय टैंकर ‘Nasha’ को दोबारा सक्रिय कर दिया है। इस जहाज को अब समुद्र में तैरते स्टोरेज टैंक की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

Kharg Island पर बढ़ा दबाव

ईरान का लगभग 90% तेल निर्यात खार्ग आइलैंड से होता है। यही देश का सबसे बड़ा तेल टर्मिनल माना जाता है। यहां करीब 30 मिलियन बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता बताई जाती है। लेकिन निर्यात रुकने से स्टोरेज तेजी से भर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब यहां बहुत कम जगह बची है और अगर यही स्थिति रही तो कुछ ही दिनों में सभी टैंक फुल हो सकते हैं।

ईरान तेल उत्पादन बंद क्यों नहीं करता?

कई लोगों के मन में सवाल है कि जब तेल बिक नहीं रहा, तो ईरान उत्पादन रोक क्यों नहीं देता? दरअसल, तेल के कुएं साधारण नल की तरह नहीं होते जिन्हें तुरंत बंद कर दिया जाए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर अचानक उत्पादन रोका गया तो जमीन के नीचे दबाव संतुलन बिगड़ सकता है। इससे पानी तेल परतों में घुस सकता है और अरबों डॉलर का तेल हमेशा के लिए जमीन में फंस सकता है। यानी आज का फैसला आने वाली पीढ़ियों की संपत्ति खत्म कर सकता है।

Nasha बना आखिरी सहारा

इसी वजह से ईरान ने अपने पुराने बेकार पड़े टैंकर Nasha को दोबारा इस्तेमाल में लिया है। यह जहाज वर्षों से निष्क्रिय बताया जा रहा था, लेकिन अब इसे तेल भरकर समुद्र में खड़ा किया जा रहा है। सरल शब्दों में कहें तो यह अब तैरता हुआ तेल गोदाम बन गया है।

हालांकि यह सिर्फ अस्थायी राहत है। अगर निर्यात रास्ता नहीं खुला, तो संकट और गहरा सकता है।

अमेरिका की आर्थिक दबाव रणनीति

यह सिर्फ सैन्य तनाव नहीं, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव बनाने की रणनीति है। तेल निर्यात ईरान की आय का बड़ा स्रोत है। अगर यही रुक गया, तो देश की आर्थिक हालत और बिगड़ सकती है।

ईरान इस समय दोहरी चुनौती झेल रहा है—एक तरफ उत्पादन रोक नहीं सकता, दूसरी तरफ तेल बेच नहीं पा रहा। ऐसे में पुराने टैंकर को जिंदा करना बताता है कि हालात कितने गंभीर हैं।

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