
आसनसोल की सियासत इन दिनों किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं। भीड़, भाषण और नारों के बीच अचानक एक गाड़ी दिखती है… ऊपर ब्लू बीकन। बस यहीं से कहानी में ट्विस्ट आता है— और कैमरे घूम जाते हैं Shatrughan Sinha की ओर।
क्या है पूरा मामला?
Asansol के जामुड़िया क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान आरोप लगा कि शत्रुघ्न सिन्हा ने ब्लू बीकन लगी गाड़ी का इस्तेमाल किया। चुनाव में आचार संहिता लागू हो… और VIP सिंबल दिख जाए…तो सवाल उठना तय है। विपक्ष ने तुरंत pitch पकड़ी “Rule book अलग, reality अलग क्यों?”
शत्रुघ्न सिन्हा का जवाब: ‘बीकन है, पर dead है’
आरोपों पर सफाई देते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा बीकन पुराना है, उन्होंने इसे लगवाया नहीं और सबसे बड़ा punch—“ये काम ही नहीं करता”
राजनीति में ये जवाब कुछ ऐसा लगा जैसे “गाड़ी में ब्रेक है, पर इस्तेमाल नहीं हुआ।”
BJP का हमला: ‘नियम सिर्फ आम लोगों के लिए?’
BJP उम्मीदवार डॉ. बिजन मुखर्जी ने इसे सीधे-सीधे आचार संहिता का उल्लंघन बताया। उनका तर्क साफ अगर बीकन है, तो मैसेज क्या जा रहा है? “Power on display… rules on standby?”
उन्होंने चुनाव आयोग में शिकायत की बात भी कही मतलब मामला अब सिर्फ सड़क से उठकर सिस्टम तक पहुंच गया है।

चुनावी नैरेटिव: छोटा मुद्दा या बड़ा हथियार?
राजनीति में मुद्दा छोटा नहीं होता… उसे बड़ा बनाया जाता है। ब्लू बीकन—एक छोटा विजुअल एलिमेंट— अब चुनावी narrative का बड़ा weapon बन गया है। ये controversy BJP को campaign में attack point देती है, और TMC को defensive mode में डालती है।
‘बीकन’ से ज्यादा ‘सिग्नल’ की लड़ाई
असल में ये लड़ाई बीकन की नहीं… signal की है। किसका message जनता तक ज्यादा जोर से पहुंचेगा? किसकी image ज्यादा साफ दिखेगी? राजनीति में perception ही reality बन जाता है और यही इस पूरे विवाद का core है।
चुनाव में हर फ्रेम मायने रखता है
Shatrughan Sinha का ये ब्लू बीकन एपिसोड दिखाता है कि चुनाव में सिर्फ भाषण नहीं… visuals भी वोट मांगते हैं। एक छोटी सी लाइट…
पूरे चुनावी माहौल को flash कर सकती है।
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