क्लासरूम के बाहर गोलियां… College बना रणभूमि, दोस्त ने ही ले ली जान

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

वाराणसी के प्रतिष्ठित उदय प्रताप कॉलेज में शुक्रवार की सुबह पढ़ाई नहीं, दहशत का सबक लिखा गया। करीब 11 बजे… जब क्लास चल रही थी, नोट्स बन रहे थे… तभी अचानक “धाय-धाय” की आवाज गूंजी। कुछ सेकंड में गलियारा क्लासरूम से क्राइम सीन बन गया।

बीए के छात्र सूर्य प्रताप सिंह… अब सिर्फ एक नाम नहीं, एक सवाल बन चुके हैं क्या अब कॉलेज भी सुरक्षित नहीं रहे?

प्रिंसिपल ऑफिस के सामने ‘मौत का एग्जाम’

गवाहों के मुताबिक, आरोपी छात्र ने बिना किसी चेतावनी के चार राउंड फायरिंग की। गोलियां सीधे सिर और सीने पर… जैसे निशाना नहीं, इरादा साफ था।

घटना की जगह प्रिंसिपल ऑफिस के ठीक सामने। यानी जहां अनुशासन की बात होती है, वहीं कानून की धज्जियां उड़ गईं। हमलावर पहली मंजिल की ओर भागा, दीवार फांदी… और फिल्मी अंदाज में पिस्टल कूड़े में फेंककर गायब हो गया।

गुस्से में उबलता कैंपस… गेट बंद, नारे तेज

सूर्य प्रताप को अस्पताल ले जाया गया, फिर BHU Trauma Center रेफर किया गया… लेकिन जिंदगी ने साथ छोड़ दिया।

खबर मिलते ही छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। मुख्य गेट बंद… नारेबाजी… तोड़फोड़…कैंपस में पढ़ाई नहीं, आक्रोश चल रहा था।

पुलिस की एंट्री… लेकिन सवाल पहले से खड़े

पुलिस कमिश्नर भारी फोर्स के साथ पहुंचे। कई थानों की फोर्स तैनात, CCTV खंगाले जा रहे हैं। आरोपी की पहचान मंजीत चौहान के रूप में हुई है। लेकिन असली सवाल वो पिस्टल लेकर कैंपस में आया कैसे?

रंजिश या वर्चस्व… या सिस्टम की नाकामी

प्रारंभिक जांच में मामला पुरानी रंजिश या वर्चस्व की लड़ाई का बताया जा रहा है। लेकिन सच्चाई इससे ज्यादा कड़वी है कॉलेज अब पढ़ाई का नहीं, पावर का मैदान बनते जा रहे हैं। जहां पहले टॉपर बनने की होड़ होती थी, अब “कौन भारी” की लड़ाई हो रही है।

एजुकेशन सिस्टम पर बड़ा सवाल

एजुकेटर प्रभाष बहादुर का बयान इस पूरी घटना का आईना है,

“हमारे शिक्षण संस्थान धीरे-धीरे लर्निंग स्पेस से पावर स्पेस में बदल रहे हैं। कैंपस में हथियार आना सिर्फ सिक्योरिटी फेलियर नहीं, बल्कि वैल्यू सिस्टम का पतन है। जब छात्र किताब से ज्यादा डर और दबदबा सीखने लगें, तो समझ लीजिए शिक्षा हार रही है।

उन्होंने कहा, प्रशासन CCTV और गार्ड बढ़ा सकता है, लेकिन जब तक मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं। यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि एजुकेशन सिस्टम की असफलता का खुला ऐलान है।”

डिग्री नहीं, डर बांट रहा है कैंपस

UP College की ये घटना सिर्फ एक क्राइम नहीं, एक ट्रेंड का ट्रेलर है। आज वाराणसी है, कल कोई और शहर होगा। आज एक छात्र गया, कल कोई और जाएगा… अगर सिस्टम नहीं जागा, तो कॉलेज “ज्ञान का मंदिर” नहीं, “खौफ का मैदान” बन जाएंगे।

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