
सुबह की पहली किरण… शंख की गूंज… और राम नाम की धुन। Droupadi Murmu जब रामनगरी पहुंचीं, तो यह सिर्फ एक विजिट नहीं थी यह आस्था का ‘हाई-प्रोफाइल मोमेंट’ था। Ayodhya आज सत्ता नहीं, श्रद्धा के रंग में रंगा हुआ था।
भव्य आगमन: सुरक्षा भी, संस्कृति भी
Droupadi Murmu गुरुवार को वासंतिक नवरात्र और हिंदी नववर्ष के पहले दिन Maharishi Valmiki International Airport पर उतरीं। पारंपरिक स्वागत, हाई-लेवल सिक्योरिटी, सड़क मार्ग से राम मंदिर तक यात्रा यहां हर कदम पर प्रोटोकॉल और परंपरा साथ-साथ चले।
राम दरबार में आरती: सत्ता से ऊपर श्रद्धा
Ram Mandir Ayodhya पहुंचकर राष्ट्रपति ने द्वितीय तल पर स्थित राम दरबार के दर्शन किए विधि-विधान से आरती उतारी उस पल…कैमरे सिर्फ तस्वीर नहीं ले रहे थे इतिहास रिकॉर्ड हो रहा था।

श्रीराम यंत्र स्थापना: आध्यात्मिक शक्ति का संकेत
दर्शन के बाद Droupadi Murmu ने श्रीराम यंत्र स्थापना पूजन में हिस्सा लिया। वैदिक मंत्र, साधु-संतों की मौजूदगी, आध्यात्मिक ऊर्जा का चरम यह सिर्फ पूजा नहीं…‘संस्कृति की पुनर्स्थापना’ का संदेश था।

शंकराचार्य द्वार से प्रवेश: परंपरा का सम्मान
रामनगरी में प्रवेश Adi Shankaracharya द्वार से हुआ। इस प्रतीकात्मक कदम ने साफ कर दिया यह यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं, दार्शनिक भी थी।
भावनात्मक असर: जनता की नजर से
अयोध्या में मौजूद लोगों के लिए यह दिन खास था। किसी ने इसे सौभाग्य कहा, किसी ने इतिहास, और कुछ ने इसे “नया युग” एक बुजुर्ग की आवाज “हमने ऐसा दिन कभी नहीं सोचा था… जब देश का राष्ट्रपति खुद रामलला की आरती करेगा।”
सिर्फ एक दौरा नहीं एक बड़ा नैरेटिव सेट करता है।
“हैंडपंप से पाइपलाइन तक: योगी के 9 साल में बदला UP या बदली कहानी?”
