लोकतंत्र की शॉर्टकट लेन से कहीं बिना वोट जीत, कहीं क्रॉस-वोटिंग का झटका

अजमल शाह
अजमल शाह

16 मार्च की सुबह 9 बजे शुरू हुई वोटिंग… शाम 4 बजे खत्म… और रात तक सियासत का चेहरा बदल चुका था. राज्यसभा चुनाव 2026 में जो दिखा, वह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं था. यह सत्ता की शतरंज थी, जहां कुछ मोहरे खुद चल पड़े और कुछ को चुपचाप सरका दिया गया.

10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव हुआ. 26 सीटें ऐसी रहीं जहां बिना एक भी वोट डाले उम्मीदवार सीधे संसद पहुंच गए.

और बाकी 11 सीटों पर जो हुआ, उसने विपक्ष के ‘एकजुटता’ के पोस्टर पर गहरी दरार खींच दी.

बिहार: जहां अनुपस्थिति ने लिख दी हार की स्क्रिप्ट

बिहार में 5 सीटों की लड़ाई थी, लेकिन मुकाबला एकतरफा हो गया. NDA के सभी 202 विधायक वोट डालने पहुंचे. दूसरी तरफ महागठबंधन के 4 विधायक गायब. नतीजा? सियासी गणित सीधा हो गया. 5वीं सीट पर जो कांटे की टक्कर होनी थी, वह भी आराम से NDA के खाते में चली गई.

राजनीतिक विश्लेषक सुरेन्द्र दुबे कहते हैं, “यह सिर्फ अनुपस्थिति नहीं, यह अंदरूनी असंतोष का सार्वजनिक ट्रेलर है.” मतलब साफ है. कहानी वोटिंग मशीन से कम और बैकडोर मीटिंग्स से ज्यादा लिखी गई.

ओडिशा: क्रॉस-वोटिंग का ‘राजनीतिक करंट’

ओडिशा में चुनाव ने अलग ही मोड़ लिया. यहां BJD मजबूत दिख रही थी, लेकिन कुछ विधायकों ने लाइन बदल दी. क्रॉस-वोटिंग हुई… और BJP ने 2 सीटें झटक लीं. मतपत्र की गोपनीयता पर सवाल उठे, मतदान बीच में रुका… और माहौल गरम.

पॉलिटिकल कमेंटेटर रूबी अरुण का तंज था, “ओडिशा में वोटिंग नहीं हुई, वफादारी की नीलामी हुई.” कठोर लग सकता है, लेकिन घटनाक्रम यही कहानी कह रहा था.

हरियाणा: 88 वोट और 10 घंटे की सस्पेंस फिल्म

हरियाणा का चुनाव किसी थ्रिलर मूवी से कम नहीं था. 90 सदस्यों वाली विधानसभा में सिर्फ 88 वोट पड़े. 2 विधायकों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बहिष्कार कर दिया. फिर शुरू हुआ असली ड्रामा. वोटिंग खत्म… शिकायतें शुरू… काउंटिंग रुकी…और रिजल्ट आया रात 1:10 बजे. यह चुनाव कम, सियासी कोर्टरूम ज्यादा लग रहा था.

जहां हर बैलेट पेपर पर बहस हो रही थी.

निर्विरोध जीत: लोकतंत्र की शॉर्टकट लेन?

7 राज्यों में 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले जीत गए. सवाल यह नहीं कि वे योग्य हैं या नहीं. सवाल यह है कि मुकाबला कहां था? जब चुनाव बिना चुनाव के हो जाए, तो लोकतंत्र थोड़ा ‘ऑटो-पायलट’ मोड में चला जाता है.

यह ट्रेंड धीरे-धीरे बढ़ रहा है… और चिंता भी.

असली कहानी: आंकड़ों के पीछे छिपा पावर गेम

इस पूरे चुनाव में एक पैटर्न साफ दिखा. जहां संगठन मजबूत था, वहां जीत आसान थी. जहां गठबंधन ढीला पड़ा, वहां हार तय थी.

NDA ने अपनी एकजुटता दिखाई. विपक्ष ने अपनी कमजोर कड़ियां. और राजनीति में अक्सर जीत वही जाता है जो अपनी कमजोरियां छुपा ले.

लोकतंत्र की चाल, जनता के सवाल

राज्यसभा चुनाव खत्म हो गए. लेकिन सवाल अभी बाकी हैं. क्या यह लोकतंत्र की ताकत है… या अंदरखाने की रणनीति का कमाल?

सियासत में जवाब कभी सीधे नहीं मिलते. बस इशारे होते हैं. और इस बार इशारे काफी तेज थे.

राज्यसभा चुनाव 2026 – पार्टी वाइज टैली

पार्टी सीटें
BJP 14
कांग्रेस 5
TMC 4
JDU 2
NCP 2
DMK 2
BJD 1
शिवसेना 1
AIADMK 1
PMK 1
UPPL 1
RLM 1
RPI 1
निर्दलीय (BJP समर्थित) 1

कुल सीटें: 37

NDA ब्लॉक (BJP + JDU + सहयोगी): 20+ का मजबूत पकड़
विपक्ष (कांग्रेस + TMC + अन्य): लगभग 10–12 के बीच
बाकी: छोटे दल + इंडिपेंडेंट = पावर बैलेंसर

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