बिहार कांग्रेस के 3 विधायक गायब, तेजस्वी के कमरे में पहुंचीं मांझी की विधायक

Ajay Gupta
Ajay Gupta

बिहार की राजनीति में ड्रामा नया नहीं है, लेकिन राज्यसभा चुनाव के दिन जो दृश्य सामने आए, उन्होंने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी।

एक तरफ विधानसभा में वोटिंग जारी थी, दूसरी तरफ खबर आई कि Indian National Congress के तीन विधायक पार्टी के संपर्क में नहीं हैं।

पहले उनके फोन नहीं उठे… फिर अचानक फोन स्विच ऑफ हो गए। राजनीतिक विश्लेषक आलोक सिंह कह रहे हैं,
“बिहार में चुनाव हो और सस्पेंस न हो, यह संभव ही नहीं।”

राज्यसभा की 5 सीटें, लेकिन असली लड़ाई सिर्फ एक

बिहार में इस बार राज्यसभा की पांच सीटें भरी जानी हैं। चार सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।

इनमें

  • Nitish Kumar
  • Ramnath Thakur
  • Nitin Nabin
  • Shivam Kumar

के नाम चर्चा में हैं। लेकिन पांचवीं सीट पर असली मुकाबला है। यहां Upendra Kushwaha और महागठबंधन के उम्मीदवार AD Singh के बीच सीधी टक्कर है। यही सीट पूरी सियासत का केंद्र बन गई है।

तेजस्वी के चैंबर में पहुंचीं मांझी की विधायक

वोटिंग के दौरान विधानसभा में एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने चर्चाओं को और तेज कर दिया। Deepa Manjhi और Jyoti Manjhi अचानक प्रतिपक्ष नेता Tejashwi Yadav के चैंबर में पहुंच गईं। दोनों Hindustani Awam Morcha की विधायक हैं।

दीपा मांझी, Jitan Ram Manjhi की बहू हैं, जबकि ज्योति मांझी उनकी समधन हैं। बस… फिर क्या था।

विधानसभा से लेकर मीडिया स्टूडियो तक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।

HUM ने दिया सफाई

तस्वीर वायरल होने के बाद HUM पार्टी को तुरंत सफाई देनी पड़ी। पार्टी प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण ने कहा कि दोनों विधायक अनजाने में वहां चली गई थीं। उनका कहना था— “चैंबर के बाहर लगा बोर्ड नहीं देखा गया था। गलती का अहसास होते ही वे तुरंत बाहर आ गईं।”

पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका समर्थन पूरी तरह NDA के साथ है।

गायब विधायक और बिगड़ते समीकरण

इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस के तीन विधायकों को लेकर है। अगर वे मतदान में हिस्सा नहीं लेते, तो महागठबंधन की गणित बिगड़ सकती है। महागठबंधन के पास अभी करीब 35 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 41 वोट चाहिए। यानी हर वोट की कीमत यहां सोने से भी ज्यादा हो गई है।

बिहार की राजनीति और ‘स्विच ऑफ’ फोन

बिहार की राजनीति में एक पुराना नियम है जब भी चुनाव आता है, कुछ फोन अचानक स्विच ऑफ हो जाते हैं। और जैसे ही रिजल्ट आता है, वही फोन फिर से फुल नेटवर्क पकड़ लेते हैं। राजनीति में इसे तकनीकी समस्या नहीं कहते इसे कहते हैं “सियासी सिग्नल”

फैसला वोटिंग से होगा

अब सारी निगाहें वोटिंग के नतीजों पर टिकी हैं। क्योंकि यह सिर्फ एक राज्यसभा सीट नहीं, बल्कि बिहार की राजनीतिक ताकत का टेस्ट भी है। अगर समीकरण पलटे तो यह चुनाव बिहार की राजनीति में नई कहानी लिख सकता है। और अगर सब योजना के मुताबिक रहा…तो यह पूरा ड्रामा सिर्फ एक और “बिहार पॉलिटिकल थ्रिलर” बनकर रह जाएगा।

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