पटना में NDA की सीक्रेट मीटिंग के बाद जानिए क्या मंत्री श्रवण का बड़ा दावा

Ajay Gupta
Ajay Gupta

पटना की सुबह अक्सर चाय, अखबार और गंगा किनारे की हवा से शुरू होती है। लेकिन आज सुबह राजधानी में हवा में राजनीति का बारूद घुला हुआ था।

जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के आवास पर गाड़ियों का काफिला लगना शुरू हुआ। कुछ ही देर में खबर फैल गई कि NDA के बड़े नेता यहां जुट रहे हैं।

दरवाज़े बंद… कैमरे बाहर… और अंदर राज्यसभा चुनाव की रणनीति का सियासी शतरंज। बैठक खत्म हुई तो बाहर आए मंत्री श्रवण कुमार
चेहरे पर आत्मविश्वास ऐसा जैसे मैच खत्म होने से पहले ही स्कोरबोर्ड देख लिया हो।

उनका बयान साफ था, “महागठबंधन जितना चाहे दावा कर ले… जीत हमारी ही होगी।”

NDA का ‘वार रूम’: कौन-कौन नेता पहुंचे

पटना में हुई इस अहम बैठक में NDA के कई दिग्गज चेहरे एक साथ दिखाई दिए।

BJP की तरफ से

  1. केंद्रीय पर्यवेक्षक विजय शर्मा
  2. केंद्रीय पर्यवेक्षक हर्ष मल्होत्रा
  3. प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी
  4. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

वहीं JDU की ओर से

  • कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा
  • मंत्री श्रवण कुमार

राजनीतिक गलियारों में यह बैठक साधारण नहीं मानी जा रही। दरअसल जब केंद्रीय पर्यवेक्षक खुद पटना पहुंच जाएं तो समझ लीजिए कि
चुनाव सिर्फ चुनाव नहीं… रणनीति का ऑपरेशन बन चुका है।

श्रवण कुमार का दावा: जीत का फॉर्मूला तैयार

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री श्रवण कुमार पूरी तरह आश्वस्त नजर आए। उन्होंने कहा कि NDA ने चुनाव के लिए मजबूत रणनीति तैयार कर ली है और परिणाम उनके पक्ष में ही आएगा।

श्रवण कुमार ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि “महागठबंधन चाहे जितने दावे कर ले, इतिहास गवाह है कि चुनाव हम जीतते आए हैं और इस बार भी जीत हमारी होगी।”

राजनीतिक भाषा में इसे कहते हैं आत्मविश्वास या फिर विपक्ष को मनोवैज्ञानिक संदेश।

राज्यसभा चुनाव में क्यों बढ़ गई हलचल

राज्यसभा चुनाव सामान्य चुनाव नहीं होता। यहां वोट जनता नहीं बल्कि विधायक डालते हैं। और यहीं से शुरू होता है संख्या बल और क्रॉस वोटिंग का गणित। ऐसे में हर वोट की कीमत अचानक बढ़ जाती है।

NDA यही सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी समीकरण आखिरी वक्त में राजनीतिक थ्रिलर में न बदल जाए। इसलिए यह बैठक सिर्फ चर्चा नहीं बल्कि सियासी मैनेजमेंट का ब्लूप्रिंट मानी जा रही है।

महागठबंधन बनाम NDA: असली मुकाबला

बिहार की राजनीति में NDA और महागठबंधन का मुकाबला नया नहीं है। लेकिन राज्यसभा चुनाव में स्थिति थोड़ी अलग होती है। यहां रणनीति, अनुशासन और गठबंधन की मजबूती सबसे ज्यादा मायने रखती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दोनों पक्ष अपने-अपने विधायकों को लेकर सतर्क हैं। यानी आने वाले दिनों में फोन कॉल, बैठकें और सियासी समीकरण और तेज हो सकते हैं।

पटना की राजनीति: जहां हर चाल मायने रखती है

बिहार की राजनीति अक्सर अपने अप्रत्याशित मोड़ों के लिए जानी जाती है। आज जो समीकरण मजबूत दिखता है कल वही अचानक सियासी पहेली बन सकता है। लेकिन फिलहाल NDA का दावा साफ है रणनीति तैयार है और जीत तय।

अब सबकी नजरें राज्यसभा चुनाव के नतीजों पर टिकी हैं। क्योंकि बिहार की राजनीति में कभी-कभी एक वोट भी पूरी कहानी बदल देता है।

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