बंगाल में वोट या बम? चुनाव आयोग की बैठक में उठा सबसे बड़ा सवाल

संजीव पॉल
संजीव पॉल

बंगाल की राजनीति का मौसम जब भी आता है, पोस्टर से ज्यादा चर्चा पोलिंग बूथ की सुरक्षा पर होती है। इसी माहौल में Election Commission of India की टीम ने कोलकाता में राजनीतिक दलों के साथ अहम बैठक की।

मीटिंग का एजेंडा साफ था आगामी West Bengal विधानसभा चुनाव को कैसे शांतिपूर्ण और हिंसा-मुक्त बनाया जाए।

कागजों पर सबने शांति की बात की… लेकिन बंगाल की सियासत जानने वाले जानते हैं कि चुनाव के वक्त असली परीक्षा मैदान में होती है।

चुनाव से पहले बड़ी बैठक

मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने आयोग की टीम के साथ दो दिन के दौरे पर राजनीतिक दलों से बातचीत की। बैठक में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और चुनावी तैयारियों, मतदाता सूची और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा हुई।

सबका साझा बयान यही रहा कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष होने चाहिए।

कौन-कौन से दल पहुंचे

बैठक में कई राष्ट्रीय दल मौजूद रहे, जिनमें शामिल थे:

  1. Bharatiya Janata Party
  2. Indian National Congress
  3. Aam Aadmi Party
  4. Communist Party of India (Marxist)
  5. National People’s Party

राज्य स्तर पर All India Trinamool Congress और All India Forward Bloc के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

मतदाता सूची और SIR पर चर्चा

बैठक में Special Intensive Revision (SIR) अभियान पर भी बात हुई। कई दलों ने इसे बड़ा और जरूरी अभ्यास बताया और चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर भरोसा जताया। आयोग ने साफ किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संशोधन के लिए Form 6, 7 और 8 अभी भी भरे जा सकते हैं।

चुनावी हिंसा की चिंता

हालांकि मीटिंग में एक मुद्दा बार-बार उठा: चुनावी हिंसा। कुछ दलों ने कहा कि बंगाल में चुनाव के दौरान अक्सर कच्चे बम, अवैध हथियार, पैसे और बाहुबल जैसे आरोप सामने आते हैं।

इसी वजह से कई पार्टियों ने बड़ी संख्या में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की तैनाती की मांग की।

आयोग की ‘जीरो टॉलरेंस’ चेतावनी

मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि चुनावी हिंसा के प्रति आयोग की Zero Tolerance Policy है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बंगाल में भी चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए आयोग पूरी तैयारी करेगा।

बैठक में सबने शांति की बात कही। लेकिन बंगाल की सियासत में असली सवाल वही है जो हर चुनाव से पहले पूछा जाता है क्या इस बार वोट से ज्यादा बम की चर्चा नहीं होगी?

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