मिडिल ईस्ट का बारूद: ईरान हमले का जख्म, एक और US सैनिक की मौत

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

मिडिल ईस्ट का आसमान फिर से धुएँ से भर गया है. बम, ड्रोन और मिसाइलों की इस खामोश शतरंज में एक और अमेरिकी सैनिक की जान चली गई. मार्च में हुए ईरानी समर्थित हमले में गंभीर रूप से घायल यह सैनिक कई हफ्तों तक अस्पताल में मौत से जूझता रहा, लेकिन आखिरकार जंग ने एक और जिंदगी निगल ली. इसके साथ ही इस संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है.

ऑपरेशन “Epic Fury” में बढ़ता अमेरिकी नुकसान

अमेरिकी सेना का दावा था कि Operation Epic Fury मिडिल ईस्ट में बढ़ते खतरों को कुचलने के लिए शुरू किया गया था. लेकिन हकीकत का मैदान कुछ और कहानी लिख रहा है.
सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों ने सुरक्षा घेरे की परतें उधेड़ दीं. उसी हमले में घायल हुआ यह सैनिक अब जिंदगी की जंग हार गया.

पेंटागन के सूत्रों का कहना है कि यह ऑपरेशन दुश्मन नेटवर्क को तोड़ने के लिए था, लेकिन जवाबी हमलों ने अमेरिकी सैनिकों को सीधा निशाना बना दिया.

सऊदी अरब का हमला बना मौत की वजह

1 मार्च की रात सऊदी अरब में अमेरिकी बेस अचानक हमलों की जद में आ गए. ड्रोन और रॉकेट की बरसात में कई सैनिक घायल हुए. उनमें से कुछ की हालत उस समय बेहद गंभीर बताई गई थी.

ताजा मौत उसी हमले का नतीजा है. अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि सैनिक लंबे इलाज के बाद भी बच नहीं पाया.

नाम अभी गुप्त, प्रोटोकॉल का इंतजार

अमेरिकी सेना ने अभी तक मृत सैनिक की पहचान सार्वजनिक नहीं की है. सैन्य नियमों के मुताबिक परिवार को आधिकारिक सूचना दिए जाने के 24 घंटे बाद ही नाम जारी किया जाता है. फिलहाल सेना ने बयान जारी कर कहा है कि यह “कठिन समय” है और परिवार के साथ पूरा सैन्य तंत्र खड़ा है.

मिडिल ईस्ट में बारूद के ढेर पर खड़ी दुनिया

ईरान और उसके सहयोगी गुटों के साथ बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र को विस्फोटक बना दिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसी रफ्तार से जवाबी हमले जारी रहे तो यह संघर्ष जल्द ही और बड़ा रूप ले सकता है.

अमेरिका अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा मजबूत करने और जवाबी कार्रवाई को और आक्रामक बनाने पर विचार कर रहा है.

अमेरिका पर बढ़ेगा घरेलू दबाव

अब जब आठ सैनिकों की मौत हो चुकी है, वॉशिंगटन में भी सवाल उठने लगे हैं. क्या यह संघर्ष लंबा खिंचने वाला है? क्या अमेरिका अपनी रणनीति बदलेगा या जवाबी कार्रवाई और तेज करेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट की राजनीति और युद्ध की दिशा तय करेंगे.

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