गोरखपुर के सूरजकुंड में महिला दिवस पर झाड़ू ने दिखाई ताकत

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

कभी-कभी शहर की असली तस्वीर सरकारी फाइलों में नहीं, झाड़ू पकड़ते लोगों की कतार में दिखती है. महिला दिवस के मौके पर Gorakhpur के मशहूर Surajkund Pokhara में कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला.

यहां अधिकारी, पार्षद, छात्र, महिलाएं और समाजसेवी एक ही मिशन पर उतर आए “कचरे को छुट्टी दो, शहर को सांस लेने दो.”

मैदान में उतरे अफसर और पार्षद

स्वच्छता अभियान की अगुवाई नगर आयुक्त Gaurav Singh Sogarwal ने खुद झाड़ू और फावड़ा उठाकर की. उनके साथ स्थानीय पार्षद और जनप्रतिनिधियों ने भी श्रमदान किया. राजनीति में भाषण देना आसान होता है, लेकिन यहां कुछ नेता सीधे कचरे से भिड़ते दिखे.

महिला शक्ति ने संभाली कमान

महिला दिवस का असली रंग तब दिखा जब बड़ी संख्या में महिलाओं ने अभियान में भाग लिया. जोनल अधिकारी Anushka Singh के नेतृत्व में महिलाओं की टीम ने पोखरे के चारों ओर सफाई का मोर्चा संभाला. संदेश साफ था स्वच्छता सिर्फ सरकारी स्कीम नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी है.

छात्रों और एनजीओ की सक्रिय भागीदारी

अभियान में Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University के छात्र-छात्राओं के साथ कई सामाजिक संस्थाओं ने भी हिस्सा लिया. कुल मिलाकर 230 से ज्यादा लोगों ने श्रमदान किया और पूरे परिसर को कचरा मुक्त बनाने में मदद की.

160 किलो प्लास्टिक बाहर

सफाई अभियान के दौरान सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया. केवल कुछ घंटों की सफाई में करीब 160 किलो सिंगल यूज़ प्लास्टिक इकट्ठा हुआ. इसे वैज्ञानिक निस्तारण के लिए एमआरएफ सेंटर भेज दिया गया.

मतलब साफ है कचरा गायब नहीं होता बस हमारी नजर से छिप जाता है.

स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारी

नगर निगम का यह अभियान आने वाले Swachh Survekshan की तैयारियों का हिस्सा भी माना जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि अगर नागरिक साथ दें तो गोरखपुर को देश के स्वच्छ शहरों की सूची में ऊपर लाया जा सकता है.

असली सवाल यही है

एक दिन का अभियान शहर को साफ नहीं करता लेकिन यह याद जरूर दिला देता है कि गंदगी सिर्फ कूड़ेदान की समस्या नहीं, आदतों की भी समस्या है. और अगर शहर के लोग सच में ठान लें तो झाड़ू सिर्फ फोटो नहीं परिवर्तन का औजार भी बन सकती है.

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