Nitish Rajya Sabha: सत्ता परिवर्तन तय? शाह की मौजूदगी में भरा पर्चा

आलोक सिंह
आलोक सिंह

बिहार की राजनीति में एक और करवट। Nitish Kumar ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। विधानसभा परिसर में दाखिल इस नामांकन के वक्त केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन और डिप्टी सीएम Samrat Choudhary मौजूद रहे।

संदेश साफ है यह सिर्फ एक पर्चा नहीं, बिहार की सत्ता संरचना का री-डिज़ाइन है।

दिल्ली की राह, पटना में हलचल

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का मतलब है बिहार में नया मुख्यमंत्री। नई कैबिनेट और नई राजनीतिक समीकरण।

सवाल यह नहीं कि कौन जाएगा दिल्ली। सवाल यह है कि पटना में किसकी ताजपोशी होगी। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि बदलाव सिर्फ चेहरे का नहीं, power equation का होगा।

विपक्ष का हमला: “हाईजैक” की थ्योरी

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने सीधा हमला बोला। उनका आरोप बीजेपी ने JDU को “हाईजैक” कर लिया है। आरजेडी नेता Shakti Singh Yadav ने तंज कसा, “202 सीटों के जनादेश वाले मुख्यमंत्री को राज्यसभा भेजा जा रहा है।”

विपक्ष इसे राजनीतिक रिटायरमेंट की स्क्रिप्ट बता रहा है। सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका का कदम कह रहा है। सच? वो शायद इन दोनों के बीच कहीं है।

जेडीयू के भीतर उबाल

दिल्ली की खबर पटना की सड़कों तक पहुंची और जेडीयू कार्यकर्ताओं में नाराज़गी खुलकर सामने आई। मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन।
पार्टी दफ्तर में तोड़फोड़। यह सिर्फ संगठनात्मक असहमति नहीं, यह कार्यकर्ताओं की उस बेचैनी का संकेत है जो खुद को दरकिनार महसूस कर रही है।

क्या यह रणनीतिक रिट्रीट है?

नीतीश कुमार की राजनीति हमेशा “सही समय पर सही मोड़” के लिए जानी जाती रही है। कभी महागठबंधन, कभी एनडीए अब विधानसभा से राज्यसभा।

क्या यह national role की तैयारी है? या बिहार की जिम्मेदारी नए हाथों में सौंपने की मजबूरी? दिल्ली की राजनीति में एंट्री उन्हें राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला सकती है। लेकिन बिहार की जमीन पर सवाल उठेंगे क्या यह जनादेश का सम्मान है या समीकरणों का संतुलन?

अगला मुख्यमंत्री कौन?

नाम अभी तय नहीं। लेकिन दावेदारों की फेहरिस्त लंबी है। बीजेपी के भीतर भी समीकरण बदल सकते हैं। JDU के भीतर भी। अगर नया चेहरा बीजेपी से आता है, तो यह power shift होगा। अगर JDU से, तो damage control। दोनों ही हालात में बिहार एक नई राजनीतिक पटकथा में प्रवेश कर चुका है।

कुर्सी बदलती है, कहानी नहीं

बिहार की राजनीति में स्थिरता अक्सर अस्थिरता के रास्ते से आती है। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना एक और उदाहरण है। यह बदलाव शांत भी हो सकता है, विस्फोटक भी। लेकिन इतना तय है पटना की राजनीति अब अगले कुछ हफ्तों तक देश की सुर्खियों में रहेगी। क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं कि नीतीश कुमार दिल्ली क्यों जा रहे हैं। सवाल यह है बिहार में सत्ता की असली चाबी अब किसके हाथ में होगी?

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