Missiles vs Mobile Calls: जयशंकर की Diplomacy on War Mode

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

मिडिल ईस्ट की रातें इन दिनों सिर्फ अंधेरी नहीं, आग की लपटों से रोशन हैं। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान के बाद ईरान के साथ तनाव चरम पर है। दुनिया “World War 3” जैसे शब्दों को ट्रेंडिंग टैग की तरह इस्तेमाल कर रही है।

लेकिन इस शोर के बीच दिल्ली ने चुप्पी नहीं साधी। भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने सीधा फोन उठाया एक कॉल तेहरान, एक कॉल येरुशलम।

Tehran और Jerusalem से सीधी बात

जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi और इजराइल के विदेश मंत्री Gideon Sa’ar से अलग-अलग बातचीत की। भारत ने साफ संदेश दिया — “Violence is not a solution.”

तेहरान में बढ़ती सैन्य हलचल और खाड़ी क्षेत्र की अस्थिरता पर भारत ने गहरी चिंता जताई। वहीं इजराइल से कहा गया कि “Dialogue and Diplomacy” ही स्थायी रास्ता है।

यह कोई रूटीन कॉल नहीं थी। यह संकेत था कि भारत सिर्फ दर्शक नहीं, एक जिम्मेदार वैश्विक खिलाड़ी है।

Gulf Equation: Oil, Economy और 80 लाख भारतीय

मुद्दा सिर्फ युद्ध का नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं। ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और रेमिटेंस सब कुछ इस क्षेत्र से जुड़ा है।

इसी क्रम में जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Mohammed bin Abdulrahman Al Thani से बात की। उन्होंने वहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर चर्चा की।

इसके अलावा UAE के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Abdullah bin Zayed Al Nahyan से भी हालात पर विचार-विमर्श हुआ।

साफ है — भारत के लिए Gulf सिर्फ भूगोल नहीं, इकोनॉमिक लाइफलाइन है।

America-Israel Strike और Iran का पलटवार

तनाव तब विस्फोटक हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने तेहरान के खिलाफ अभियान की घोषणा की।

इसके जवाब में ईरान ने कतर, UAE, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी-इजराइली सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। दक्षिण ईरान के एक गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया है।

युद्ध अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं — यह रणनीतिक संदेशों और प्रतीकात्मक हमलों का खेल बन चुका है।

India’s Official Line: संयम ही समाधान

विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ा बयान जारी करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।

भारत ने दो टूक कहा:

  1. नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है
  2. क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान हो
  3. संवाद से ही समाधान संभव है

दिल्ली का रुख साफ है — “No Escalation, Only Conversation.”

Missile बनाम Mobile

दुनिया मिसाइल गिन रही है, और भारत मिनट गिन रहा है फोन कॉल के। जब बड़े देश “Shock and Awe” की भाषा बोलते हैं, तब भारत “Talk and Allow” का रास्ता सुझा रहा है।

कभी-कभी कूटनीति बोरिंग लगती है। लेकिन इतिहास गवाह है जो युद्ध जीतते हैं, वे सुर्खियों में आते हैं; जो युद्ध रोकते हैं, वे भविष्य बचाते हैं।

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