
मिडिल ईस्ट की सियासत में बड़ा भूचाल तब आया जब Ali Khamenei की इजरायली हमले में मौत हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान में उनके आवास और दफ्तर को निशाना बनाया गया, जिसमें कई मिसाइलें दागी गईं। आधिकारिक पुष्टि के बाद देश में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया।
अब सबसे बड़ी चर्चा उत्तराधिकार को लेकर है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि उनके बेटे Mojtaba Khamenei को अगला Supreme Leader चुना गया है। हालांकि औपचारिक ऐलान अभी बाकी बताया जा रहा है, लेकिन सियासी गलियारों में उनका नाम पहले से ही रेस में सबसे आगे माना जा रहा था।
कैसे चुना जाता है ईरान का Supreme Leader?
ईरान के संविधान के मुताबिक Supreme Leader का चुनाव सीधे जनता नहीं करती। यह जिम्मेदारी 88 सदस्यीय Assembly of Experts के पास होती है। यह परिषद जनता द्वारा चुनी जाती है, लेकिन Supreme Leader का चयन आंतरिक मतदान प्रक्रिया से होता है।
यह पद जीवनपर्यंत होता है, जब तक कि पदाधिकारी की मृत्यु, अक्षमता या पदच्युत होने की स्थिति न बन जाए।
Israel-Iran Tension: Conflict या Regime Shift?
हालिया हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। इजरायल और अमेरिका द्वारा की गई संयुक्त सैन्य कार्रवाई को लेकर तेहरान में आक्रोश है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि Mojtaba Khamenei को औपचारिक रूप से Supreme Leader घोषित किया जाता है, तो इसे सत्ता के “dynastic continuity” के रूप में भी देखा जाएगा।

ईरान की राजनीति अब केवल धार्मिक नेतृत्व का मामला नहीं रही, बल्कि यह Middle East power balance का केंद्रीय बिंदु बन चुकी है।
Political Satire Angle
तेहरान की सत्ता का ट्रांजिशन कुछ ऐसा दिख रहा है जैसे किसी बड़ी कॉरपोरेट कंपनी में CEO की कुर्सी सीधे “इन-हाउस प्रमोशन” से भर दी गई हो। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां बोर्ड मीटिंग की जगह धार्मिक परिषद है और शेयर मार्केट की जगह भू-राजनीति।
अब नजर इस बात पर है कि आधिकारिक घोषणा कब होती है और क्या इससे Middle East में शक्ति संतुलन और अधिक अस्थिर होगा।
TMC Rajya Sabha Candidates 2024: मेनका पहली LGBTQ सांसद
