
बिहार की सियासत में अक्सर चुनावी वादों की चर्चा होती है, लेकिन इस बार क्लासरूम की घंटी बज गई है। नीतीश कुमार सरकार ने सरकारी शिक्षकों के प्रमोशन, ट्रांसफर और वेतन को लेकर बड़ा फैसला लिया है।
जो मास्टर साहब वर्षों से “फाइल कब आगे बढ़ेगी?” पूछ रहे थे, उनके लिए अब कैलेंडर पर अप्रैल 2026 का गोला बना दीजिए।
अप्रैल 2026 से प्रमोशन प्रोसेस शुरू
शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में साफ किया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 खत्म होते ही प्रमोशन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
पहले चरण में प्राइमरी और मिडिल स्कूल के शिक्षक शामिल होंगे, फिर बाकी कैटेगरी। सरकार का दावा है कि प्रक्रिया fair & transparent होगी सेवा अवधि, योग्यता और विभागीय नियमों के आधार पर।
यानी इस बार “किसकी सिफारिश भारी” नहीं, बल्कि “किसकी फाइल पूरी” चलेगी कम से कम आधिकारिक दावा तो यही है।
ट्रांसफर पॉलिसी: दूर-दराज वालों के लिए राहत?
नई ट्रांसफर पॉलिसी पर भी काम लगभग पूरा है। जून 2026 से बड़े स्तर पर तबादले शुरू होंगे। दूर-दराज के इलाकों में पोस्टेड शिक्षकों के लिए यह फैसला बड़ी राहत हो सकता है। सालों से जो शिक्षक घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर ड्यूटी दे रहे हैं, उन्हें अब उम्मीद है कि “होम डिस्ट्रिक्ट” का सपना शायद सच हो जाए।
बेशक, ट्रांसफर लिस्ट आते ही राजनीतिक और सामाजिक समीकरण भी एक्टिव हो जाते हैं बिहार है, यहां हर सूची में चर्चा तो बनती ही है।

होली से पहले वेतन: रंगों से पहले राहत
सरकार ने फरवरी महीने का वेतन होली से पहले जारी करने का फैसला लिया है। करीब 7.5 लाख कर्मचारियों को फायदा मिलेगा, जिनमें 5.85 लाख से ज्यादा शिक्षक और हेडमास्टर शामिल हैं। होली से पहले सैलरी का मतलब साफ है इस बार गुलाल थोड़ा ज्यादा उड़ेगा।
68 हजार करोड़ का एजुकेशन बजट
2026-27 के बजट में शिक्षा विभाग के लिए 68 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल सुविधाएं और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा। हालांकि, विशेषज्ञ कहते हैं बजट की घोषणा आधी कहानी है, असली परीक्षा उसके सही क्रियान्वयन में होती है।
मनोबल बनाम मैनेजमेंट
शिक्षकों का कहना है कि प्रमोशन और समय पर वेतन से उनका मनोबल बढ़ेगा। सवाल यह भी है क्या इससे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई का स्तर भी उसी रफ्तार से ऊपर जाएगा? बिहार की शिक्षा व्यवस्था अक्सर आलोचना के केंद्र में रही है। ऐसे में यह फैसला एक प्रशासनिक कदम ही नहीं, बल्कि इमेज बिल्डिंग एक्सरसाइज भी माना जा रहा है।
सियासत में क्लास टेस्ट
नीतीश सरकार का यह फैसला शिक्षकों के लिए राहत जरूर है। अब देखना यह है कि अप्रैल 2026 की तारीख सिर्फ फाइलों में रहती है या वाकई प्रमोशन लेटर हाथ में आता है। फिलहाल तो स्टाफ रूम में चर्चा गर्म है “इस बार सच में कुछ बदलने वाला है या फिर अगली मीटिंग तक इंतजार?”
“500 की रफ्तार, CM का थम्स-अप तैयार!” – मैग्लेव में योगी का हाई-स्पीड अनुभव
