“कैंपस में क्लास कम, क्लैश ज्यादा? लाल बारादरी पर छिड़ी नई बहस”

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

University of Lucknow में ‘लाल बारादरी’ परिसर में नमाज पढ़ने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रशासन द्वारा जारी नोटिस और गेट बंद किए जाने के फैसले के खिलाफ छात्र संगठनों ने विरोध मार्च का ऐलान किया है।

राजधानी Lucknow में परिवर्तन चौराहे से डीएम कार्यालय तक मार्च की तैयारी के बीच पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है।

नोटिस बनाम अधिकार: बहस की असली जमीन

प्रशासन का कहना है कि कैंपस में धार्मिक गतिविधियों से तनाव की आशंका हो सकती है और शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्रों का तर्क है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करना किसी भी तरह से सौहार्द नहीं बिगाड़ता। वे नोटिस वापस लेने और ‘लाल बारादरी’ के गेट खोलने की मांग कर रहे हैं।

दूसरे संगठनों की एंट्री, पुलिस की सक्रियता

विवाद उस समय और गहरा गया जब Bajrang Dal के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किया और कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया और कैंपस व आसपास गश्त बढ़ा दी। प्रशासन का फोकस फिलहाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है।

लाल बारादरी क्यों बनी केंद्र?

मामला तब उभरा जब कुछ छात्रों द्वारा परिसर में नमाज अदा किए जाने का वीडियो वायरल हुआ। इसके बाद प्रशासन ने कारण बताओ नोटिस जारी किए और एहतियातन परिसर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। छात्र संगठनों का कहना है कि यह कदम “ओवर-रिएक्शन” है; प्रशासन का कहना है कि यह “प्रिवेंटिव एक्शन” है।

छात्र एकता: नया समीकरण

इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम पहलू यह रहा कि अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्र एक मंच पर दिखाई दिए। कुछ छात्रों का कहना है कि मुद्दा सिर्फ नमाज का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और अभिव्यक्ति की आजादी का है। वहीं, प्रशासन पढ़ाई और शांति को सर्वोच्च प्राथमिकता बता रहा है।

‘डिबेट सोसाइटी’ अब रियल-टाइम में

यूनिवर्सिटी में आमतौर पर बहसें ऑडिटोरियम में होती हैं, लेकिन इस बार डिबेट सीधे गेट पर है। सवाल वही पुराना—कैंपस सिर्फ किताबों का होगा या विचारों का भी?

डीएम कार्यालय पर ज्ञापन सौंपे जाने के बाद प्रशासन का रुख साफ होगा। क्या नोटिस वापस होंगे या सख्ती जारी रहेगी यह आने वाले दिनों में तय होगा।

फिलहाल, सबकी निगाहें वार्ता और समाधान पर हैं, ताकि शैक्षणिक वातावरण प्रभावित न हो।

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