तेल कंपनियों की टेंशन—‘इतनी जल्दी ब्रेक मत लगाइए सरकार!’

Jyoti Atmaram Ghag
Jyoti Atmaram Ghag

भारत और अमेरिका के बीच हुए तेल व्यापार समझौते ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल मचा दी है। इस डील के बदले अमेरिका ने भारत पर लगाया गया टैरिफ घटाकर 18% कर दिया है।

लेकिन असली बम तब फूटा, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा कर दिया कि अब भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा बल्कि अमेरिका और वेनेजुएला से खरीदेगा।

सरकार चुप, कंपनियां बेचैन

दिलचस्प बात ये है कि केंद्र सरकार ने अब तक न तो ट्रंप के दावे की पुष्टि की है और न ही रूस से तेल खरीद रोकने का कोई आदेश जारी किया है

यहीं से ऑयल सेक्टर में बेचैनी शुरू हो गई है। इंडियन ऑयल कंपनियों ने सरकार से साफ कहा है, “एकदम से ब्रेक मत लगाइए, हमें टाइम चाहिए।”

अचानक खरीद बंद क्यों मुश्किल?

तेल कंपनियों के सामने सिर्फ पॉलिटिक्स नहीं, टेक्निकल और कॉन्ट्रैक्चुअल मजबूरियां भी हैं। रूसी तेल अब डिलीवर हो रहा है। मार्च तक कई शिपमेंट पहले से तय हैं। नई कंपनियों से डील सेट करने में वक्त लगेगा। सप्लाई चेन और पेमेंट सिस्टम overnight नहीं बदलते।

Nayara Energy सबसे बड़ी चिंता

रूसी तेल पर सबसे ज्यादा निर्भर Nayara Energy के लिए हालात और टफ हैं। इराक और सऊदी अरब से सप्लाई पहले ही बंद। अप्रैल में रिफाइनरी मेंटेनेंस। अचानक स्विच किया तो कच्चे तेल का संकट तय।

Non-Aligned India: संतुलन की राजनीति

भारत न तो किसी दबाव में फैसला करता है और न ही रिश्ते तोड़ने में जल्दबाज़ी करता है। Non-Aligned Policy के तहत भारत रूस और अमेरिका—दोनों से बैलेंस बनाकर चलता है।

मतलब साफ है तेल बंद = दोस्ती खत्म, ऐसा नहीं होता, फैसले समय और रणनीति के साथ होते हैं।

तेल कोई WhatsApp मैसेज नहीं कि “Seen” करते ही बंद हो जाए। यहां बैरल, बुकिंग और अरबों डॉलर की बात है—ट्वीट से नहीं, टेबल टॉक से फैसला होगा।

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