श्मशान का रास्ता बंद, सड़क बना चिता! 91 साल की दलित महिला का अंतिम संस्कार चौराहे पर

Ajay Gupta
Ajay Gupta

बिहार के वैशाली जिले से आई यह तस्वीर किसी रिपोर्ट से ज्यादा, एक सिस्टम पर सवाल है। 91 वर्षीय दलित महिला चमकी देवी की मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार श्मशान घाट में नहीं, बल्कि गांव के सड़क चौराहे पर करना पड़ा। वजह? श्मशान तक जाने वाला रास्ता—जो पीढ़ियों से इस्तेमाल होता रहा—अब अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका था।

रास्ता नहीं मिला, सम्मान भी नहीं

गोरौल प्रखंड के इस गांव में परिवार शव लेकर जब श्मशान की ओर बढ़ा, तो स्थानीय दुकानदारों ने रास्ता रोक दिया। कहा गया—“यह निजी जमीन है।” बहस हुई, विनती हुई, लेकिन इंसानियत नहीं जागी। आखिरकार परिवार ने खुले चौराहे को ही चिता बना दिया। यह सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं थी, बल्कि सामाजिक व्यवस्था की नाकामी थी।

पुरानी समस्या, नया शिकार

ग्रामीणों का कहना है कि यह विवाद नया नहीं है। सालों से दुकानों और कब्जों ने रास्ता संकरा नहीं, बल्कि खत्म कर दिया है। लेकिन हर बार प्रशासनिक चुप्पी हावी रही—जब तक कि एक शव सड़क पर नहीं जला।

प्रशासन हरकत में, सवाल अब भी जिंदा

घटना सामने आने के बाद जिलाधिकारी वर्षा सिंह पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। जांच कमेटी बनी, सहायता की घोषणा हुई, कार्रवाई के संकेत दिए गए। लेकिन सवाल अब भी वही है—क्या इंसाफ तब ही मिलेगा जब तस्वीरें वायरल होंगी?

यह नया भारत है—जहां हाईवे चौड़े हो सकते हैं, लेकिन श्मशान का रास्ता नहीं। जहां ‘Ease of Living’ के दावे हैं, पर मरने के बाद भी जाति रास्ता रोक लेती है।

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