
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां दुनिया के सामने गाजा में शांति स्थापित करने का दावा कर रहे हैं, वहीं ज़मीन पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
सीजफायर के ऐलान के बावजूद इजरायल ने एक बार फिर गाजा पर एयर स्ट्राइक कर दी, जिसमें बच्चों और पुलिसकर्मियों समेत 30 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है।
शांति की घोषणाओं और हवाई हमलों के इस विरोधाभास ने ट्रंप के मिडिल ईस्ट पीस प्लान पर ही सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
Airstrike में मासूमों की कीमत
गाजा सिविल डिफेंस के मुताबिक, शनिवार रात हुए इजरायली हमलों में एक ही परिवार की तीन मासूम बच्चियों की मौत। कई घर और विस्थापितों के टेंट तबाह। पुलिस स्टेशनों को भी बनाया गया निशाना। शेख रदवान इलाके के पुलिस स्टेशन पर बम गिरने से 13 लोगों की मौत, जिनमें 5 पुलिसकर्मी शामिल हैं।
“अगर Ceasefire है, तो बम क्यों?”
खान यूनिस में रहने वाले समर अल-अतबाश कहते हैं,“मेरी तीन भतीजियां खेल रही थीं… अब सिर्फ उनकी लाशें बची हैं। अगर युद्धविराम है, तो ये मौतें क्यों?”
यह सवाल अब सिर्फ गाजा नहीं, पूरी दुनिया पूछ रही है।
Israel का पलटवार वाला तर्क
इजरायली सेना का कहना है कि राफाह में हमास लड़ाकों ने सुरंग से हमला किया। एक हमास कमांडर को गिरफ्तार किया गया। Ceasefire तोड़ा गया, लेकिन दोष गाजा पर।

हालांकि, राफाह इलाका पहले से इजरायल के कंट्रोल में बताया जा रहा है—यहीं से विवाद और गहराता है।
Ceasefire या सिर्फ कागज़ी शांति?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Ceasefire के बाद अब तक 500+ फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। जवाबी कार्रवाई में 4 इजरायली सैनिकों की मौत। इसी बीच ट्रंप राफाह बॉर्डर खोलने की तैयारी में हैं।
ऐसे में लगातार हो रहे हमले उनके शांति प्रयासों को डिप्लोमैटिक झटका दे सकते हैं।
टीवी स्क्रीन पर शांति के भाषण, और ज़मीन पर बच्चों की लाशें— यही है Middle East का “Ceasefire Model”।
