
उत्तर प्रदेश में महंगाई पहले ही आम आदमी का स्विच ऑफ कर चुकी है, अब बिजली विभाग ने भी फुल वोल्टेज झटका दे दिया है।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के नए आदेश के मुताबिक, फरवरी महीने से बिजली उपभोक्ताओं को 10 प्रतिशत ज्यादा बिल चुकाना होगा।
दरअसल, बिजली कंपनियां अब फरवरी के बिल में जनवरी महीने का 10% फ्यूल सरचार्ज भी जोड़ेंगी। इसका सीधा असर करोड़ों उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
616 करोड़ रुपये की सीधी वसूली
आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ फरवरी महीने में ही बिजली विभाग करीब 616.05 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं से वसूलेगा। यानी यूनिट वही, सप्लाई वही — लेकिन बिल का करंट और तेज।
सवाल यह नहीं कि फ्यूल सरचार्ज लगा या नहीं, सवाल यह है कि इतना ज्यादा, और एक साथ क्यों?
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का विरोध
बिजली कंपनियों के इस फैसले पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद भड़क उठी है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसे उपभोक्ताओं पर सीधा आर्थिक हमला बताया।
उन्होंने फ्यूल सरचार्ज पर तुरंत रोक लगाने। बिजली खरीद की स्वतंत्र जांच कराने और नियामक आयोग के सामने इसे असंवैधानिक करार देने की मांग की है।
उनका साफ कहना है— “इतिहास में पहली बार इतना भारी फ्यूल सरचार्ज लोगों पर थोपा गया है।”
अचानक 10% क्यों? यहीं उठता है बड़ा सवाल
जनवरी 2025 में उपभोक्ताओं से सिर्फ 2.33% फ्यूल सरचार्ज लिया गया था। दिसंबर में यह 5.56% तक पहुंचा। और अब — सीधा 10%।
यानी ग्राफ नहीं, सीढ़ी नहीं — सीधा छलांग। जनवरी 2025 से अब तक यह सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी है।

बिजली कंपनियां खुद तय कर रहीं सरचार्ज?
असल जड़ जनवरी 2025 में लागू हुए Multi Year Tariff Regulation 2025 से जुड़ी है। इस नियम के तहत बिजली कंपनियों को Fuel & Power Purchase Adjustment Surcharge तय करने की छूट मिल गई।
नतीजा?
हर महीने बिजली कभी महंगी कभी सस्ती और उपभोक्ता हर बार कन्फ्यूज़।
बिजली खरीद पर भी सवाल
उपभोक्ता परिषद ने बिजली खरीद की कीमतों पर भी उंगली उठाई है। UPPCL के अनुसार, नवंबर 2025 में 8849.03 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई कीमत: ₹5.79 प्रति यूनिट। जबकि नियामक आयोग ने स्वीकार्य दर बताई थी ₹4.94 प्रति यूनिट।
अवधेश वर्मा का सवाल बिल्कुल सीधा है “जब मई 2025 की भीषण गर्मी में 4.76 रुपये में बिजली मिल सकती थी, तो अब अचानक इतनी महंगी कैसे हो गई?”
बिजली का बिल अब सिर्फ मीटर नहीं गिनता, नीतियों की कीमत भी जोड़ता है।
अगर यही हाल रहा, तो अगला सवाल यूनिट का नहीं होगा — घर में पंखा चलाएं या बजट?
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