
गुजरात में चुनावी प्रक्रिया के बीच ड्राफ्ट मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद करीब 1.73 करोड़ मतदाताओं का डेटा पुराने रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा। इस भारी मिसमैच ने राज्य चुनाव तंत्र में चिंता पैदा कर दी है।
डेटा मिसमैच की वजहें
राज्य में कुल 4.34 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। जांच में पता चला कि बड़ी संख्या में नाम, उम्र और पता जैसी जानकारियां पुरानी मतदाता सूची (2002) से मेल नहीं खा रही। चुनाव विभाग के अनुसार ये ज्यादातर डेटा एंट्री की पुरानी गलतियां हैं, मतदाताओं की नहीं।
नोटिस और सत्यापन प्रक्रिया
चुनाव विभाग ने बीएलओ (Booth Level Officer) के माध्यम से संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजना शुरू किया। नोटिस में मतदाताओं को दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जानकारी की पुष्टि करने को कहा गया है।
- नाम जोड़ने के लिए: 6,54,000 फॉर्म (फॉर्म 6 और 6A)
- नाम हटाने के लिए: 12,64,000 फॉर्म (फॉर्म 7A)
- सुधार/स्थानांतरण के लिए: 5,04,000 फॉर्म (फॉर्म 8)
विपक्षीय सवाल और नाराज़गी
हालांकि चुनाव आयोग के निर्देश थे कि जिन मतदाताओं ने पहले ही दस्तावेज जमा कर दिए हैं, उन्हें दोबारा नोटिस नहीं भेजी जानी चाहिए। इसके बावजूद कई इलाकों से शिकायतें आई हैं, जिससे जनता में असहमति और असमंजस देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने पहले ही सरकार पर वोट चोरी और मनमानी का आरोप लगाए हैं।

अंतिम मतदाता सूची और समय सीमा
मुख्य चुनाव अधिकारी हारीत शुक्ला ने बताया कि ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां लगातार मिल रही हैं। 30 जनवरी तक मतदाता अपने दावे दर्ज करा सकते हैं। सभी आवेदनों की जांच के बाद ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
चुनाव आयोग की अपील
चुनाव विभाग ने अपील की है कि जिन लोगों को नोटिस मिला है वे घबराएं नहीं, बल्कि जरूरी दस्तावेजों के साथ समय पर उपस्थित होकर सत्यापन करवाएं, ताकि उनका मताधिकार सुरक्षित रहे।
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