
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के विधायक अब्बास अंसारी को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में नियमित जमानत दे दी।
अब्बास अंसारी, दिवंगत गैंगस्टर-से-नेता मुख्तार अंसारी के बड़े बेटे हैं और मऊ सदर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Bail मिली, लेकिन Rule Book हाथ में रहेगी
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि अब्बास अंसारी उत्तर प्रदेश से बाहर जा सकते हैं, लेकिन उससे पहले उन्हें ट्रायल कोर्ट को लिखित सूचना देनी होगी, सूचना में मोबाइल नंबर, यात्रा का उद्देश्य और पूरी लोकेशन डिटेल देना अनिवार्य होगा।
यानि आज़ादी मिली है, लेकिन tracking on रहेगी।
Interim Bail की शर्तें रहेंगी बरकरार
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अंतरिम राहत के दौरान लगाई गई सभी शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा। सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने पक्ष रखा, लेकिन तमाम तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत को नियमित कर दिया।
All Cases = All Bail, Legal राहत पूरी
अब्बास अंसारी कई आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन अन्य मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी थी। इस फैसले के बाद वह सभी मामलों में जमानत पर हैं। कानूनी हलकों में इसे अंसारी परिवार के लिए बड़ी legal relief माना जा रहा है।

Background: HC से लेकर Assembly तक
सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत की शर्तों में ढील दी थी। उन्हें लखनऊ स्थित सरकारी आवास में रहने की अनुमति दी गई थी। उससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाई थी, जिसके बाद UP विधानसभा में उनकी सदस्यता बहाल कर दी गई थी।
Hate Speech Case बना था बड़ी वजह
अब्बास अंसारी पर आरोप है कि 2022 विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने एक सार्वजनिक सभा में भड़काऊ भाषण दिया। सरकारी अधिकारियों को धमकी भरे लहजे में चेतावनी दी कि “समाजवादी पार्टी के सत्ता में आने पर हिसाब बराबर किया जाएगा।”
Mukhtar Ansari Factor
मुख्तार अंसारी का दशकों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गहरा असर रहा। उनके निधन के बाद, अब्बास अंसारी ने यह राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाई और 2022 में मऊ सदर सीट जीतकर विधानसभा पहुंचे।
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