अब नक्शा नहीं अटकेगा फाइलों में! योगी सरकार ने चला दी ‘NOC कैंची’

महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

उत्तर प्रदेश में मकान या भवन का नक्शा पास कराने वालों के लिए राहत भरी खबर है। योगी आदित्यनाथ सरकार अब नक्शा पास करने की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और कम झंझट वाला बनाने जा रही है। इसके तहत Non-Objection Certificate (NOC) की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।

अब नक्शा पास कराने के लिए गैर-जरूरी NOC नहीं मांगी जाएगी, और जहां आवश्यकता होगी, वहां एक ही प्रोफार्मा में सभी जरूरी NOC ली जाएंगी।

15 दिन में निपटेंगी आपत्तियां, नहीं चलेगा ‘लटकाओ सिस्टम’

अब तक नक्शा फाइलें महीनों तक धूल फांकती रहती थीं, लेकिन नए निर्देशों के अनुसार किसी भी तरह की आपत्ति का निपटारा 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।

प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद ने विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों के साथ बैठक में साफ कहा है— “बिना वजह किसी भी नक्शे को रोका न जाए।”

यानि अब “फाइल घूमती रहे” वाला खेल मुश्किल में है।

सिर्फ संवेदनशील इलाकों में ही मांगी जाएगी NOC

नए नियमों के मुताबिक केवल शासकीय भवनों और हेरिटेज जोन में ही NOC जरूरी होगी। सामान्य रिहायशी या व्यवसायिक क्षेत्रों में फालतू अनुमति का बोझ नहीं।

साथ ही, Lucknow Development Authority (LDA) की प्रक्रिया को पूरे प्रदेश के लिए मॉडल के तौर पर अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

5 सदस्यीय समिति बनाएगी नया रोडमैप

पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए आवास विभाग ने 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति की सिफारिशों को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी के बाद नियमों को प्रदेशभर में लागू किया जाएगा।

इससे फैसलों में देरी और अफसरशाही दोनों पर लगाम लगेगी।

चौंकाने वाले आंकड़े: हजारों नक्शे लटके पड़े

जांच में सामने आया है कि दिसंबर 2025 तक— कुल जमा नक्शे: 2517, पास हुए: 596, रिजेक्ट: 373 अब तक लंबित: 1544 यानी आधे से ज्यादा फाइलें अभी तक “निर्णय के इंतजार” में थीं। सरकार अब इस स्थिति को बदलना चाहती है।

2025 की नई बिल्डिंग बायलॉज लागू

सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए गए हैं कि Model Building & Development Byelaws, Zoning Regulation-2025 के अनुसार ही नक्शों को स्वीकृत किया जाए।

अब तक नक्शा पास कराना ऐसा था जैसे “ईंट-सीमेंट से पहले चक्कर-दर-चक्कर जरूरी है।”

लेकिन नए फैसले से उम्मीद है कि निर्माण आसान होगा। रियल एस्टेट को रफ्तार मिलेगी। आम आदमी की जेब और समय दोनों बचेंगे।

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