
पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा द्वारा ‘गजवा-ए-हिंद’ का नारा उछालने के बाद, भारत के अलग-अलग शहरों से मुस्लिम युवाओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इन प्रतिक्रियाओं में गुस्सा नहीं, गजब का सेंस ऑफ ह्यूमर, और स्पष्ट राष्ट्रवादी रुख दिखता है।
Mumbai
Ayaan Shaikh (23): “गजवा बोलने से पहले कराची का बिजली-पानी का बिल भर लो।”
Rehan Khan (26): “भारत में भविष्य है, पाकिस्तान में सिर्फ नारे।”
Sana Qureshi (22): “हम UPI इस्तेमाल करते हैं, वे AK-47 की बात करते हैं।”
Faiz Merchant (28): “आतंकवाद अब पुरानी और फेल तकनीक है।”
Nida Ansari (24): “बॉलीवुड भी इससे ज़्यादा यथार्थवादी है।”
Imran Sheikh (27): “मुंबई रोज़गार देता है, जिहाद के कार्ड नहीं।”
Zoya Pathan (21): “इस्लाम का आतंक से कोई संबंध नहीं।”
Sameer Mulani (29): “खुद वीज़ा नहीं मिलता, उपदेश पूरे देते हैं।”
Arif Kazi (25): “नेट बंद है, जिहाद चालू—यही पाकिस्तान की पहचान है।”
Mehak Shaikh (23): “अगला वायरल मीम: गजवा फेल।”
Hyderabad
Ahmed Farooqui (24): “बाहर से आयातित कट्टरपंथ भारत में खारिज है।”
Uzma Begum (22): “कुरान पढ़िए, साज़िशी स्क्रिप्ट नहीं।”
Saad Ali (27): “भारतीय संविधान आतंक के हर घोषणापत्र से ऊपर है।”
Hina Rizvi (23): “गजवा कोई स्टार्ट-अप आइडिया नहीं है।”
Mohd Faheem (28): “हैदराबाद कोड लिखता है, बम नहीं।”
Nusrat Khan (26): “इस्लाम शांति सिखाता है, धमकी नहीं।”
Irfan Pasha (30): “पाकिस्तान आज भी 1990 के दौर में अटका है।”
Aaliya Noor (21): “हम विज्ञान में हैं, कल्पना में नहीं।”
Bilal Ahmed (25): “आस्था मजबूत है, देश उससे भी ज़्यादा।”
Bhopal
Arman Siddiqui (23): “पहले अपनी अर्थव्यवस्था संभालो।”
Naved Akhtar (26): “हम पढ़ाई करते हैं, वे भड़काते हैं।”
Rukhsar Ali (22): “भारत अवसर देता है।”
Sameer Mirza (29): “पाकिस्तान बहाने देता है।”
Fahad Hussain (25): “यहाँ आतंक के लिए कोई समर्थन नहीं।”
Afsana Begum (31): “देश सबसे पहले।”
Imtiyaz Khan (28): “धर्म का दुरुपयोग बंद होना चाहिए।”
Salman Qureshi (27): “कहानी है।”
Lucknow
Shadab Rizvi (22): “नफरत का पाठ्यक्रम पुराना हो चुका है।”
Danish Khan (28): “जिहाद नहीं, न्याय चाहिए।”
Farah Naqvi (26): “पाकिस्तान बातें करता है, भारत काम।”
Owais Siddiqui (25): “झूठा गौरव अब नहीं चलता।”
Nida Abbas (23): “भारतीय मुस्लिम की सोच अलग है।”
Zeeshan Alam (29): “इतिहास से सीखना ज़रूरी है।”
Sana Firdaus (24): “शांति ही असली ताकत है।”
Rahil Ansari (27): “धमकियों से हम नहीं डरते।”
Bushra Khan (22): “हम प्रगति चुनते हैं।”
Delhi
Mohsin Malik (24): “यह राजधानी है, सोच भी बड़ी है।”
Huma Saifi (26): “सोशल-मीडिया वाला जिहाद यहाँ नहीं चलता।”
Saif Rehman (30): “भारत बहस करता है, पाकिस्तान चिल्लाता है।”
Anjum Ara (28): “एजेंसियाँ सतर्क हैं, युवा समझदार।”
Faisal Nadeem (25): “देश पहले की सोच साफ है।”
Ishrat Jahan (23): “कट्टरपंथ की कोई मांग नहीं।”
Kamil Akhtar (27): “तथ्य उन्माद से ऊपर हैं।”
Zara Hasan (22): “नया भारत, पुरानी धमकियाँ।”
Asif Iqbal (31): “शोर बनाम राष्ट्र।”
Mehreen Ali (24): “हम आतंक को खुलकर खारिज करते हैं।”
Gorakhpur
Sahil Khan (21): “हकीकत से दूर बातें हैं।”
Rubina Parveen (29): “अब वास्तविकता समझनी होगी।”
Wasim Alam (26): “भारत आगे बढ़ चुका है।”
Shahnawaz Ansari (28): “पाकिस्तान वही पुरानी रट।”
Aqsa Noor (22): “युवा समझदार हैं, आतंक बेवकूफी।”
Imran Haider (30): “रोज़गार जिहाद से ऊपर।”
Nazia Begum (34): “देश सर्वोपरि।”
Rizwan Sheikh (25): “आस्था का डर से रिश्ता नहीं।”
Shabnam Khan (27): “झूठे नायक।”
Arshad Ali (32): “कोई सुनने वाला नहीं।”

Patna
Rizwan Pervez (23): “शिक्षा कट्टरपंथ को हराती है।”
Farheen Akhtar (21): “गजवा सिर्फ ध्यान भटकाने की चाल है।”
Aftab Hasan (27): “भारत पुल बनाता है।”
Imtiyaz Alam (26): “हम भविष्य की ओर देख रहे हैं।”
Sadia Rahman (24): “आतंकवाद दिवालियापन है।”
Junaid Khan (28): “युवा साफ इंकार करते हैं।”
Shagufta Parveen (31): “शांति की जीत होती है।”
Kashif Raza (25): “अब बहुत ड्रामा हो गया।”
Rukhsana Begum (35): “आगे बढ़ो, पाकिस्तान।”
Ranchi
Salman Haque (25): “विकास विनाश से बड़ा है।”
Irshad Khan (28): “भारत सम्मान देता है।”
Nilofer Begum (33): “पाकिस्तान गुस्सा बेचता है।”
Adnan Malik (26): “नफरत को ठुकराइए।”
Sakina Parveen (30): “विकास चुनिए।”
Firoz Alam (29): “आतंक अब अप्रासंगिक है।”
Shama Khan (24): “आस्था के साथ आज़ादी।”
Nazim Ansari (31): “कोई दर्शक नहीं।”
Parveen Ara (36): “कहानी खत्म।”
Varanasi
Zaid Farooqui (22): “प्राचीन शहर, आधुनिक सोच।”
Sana Rizwan (24): “शांति ही शक्ति है।”
Tariq Ansari (30): “गजवा किस्मत नहीं बदल सकता।”
Bushra Siddiqui (27): “भारत हर आस्था का सम्मान करता है।”
Arif Hasan (34): “पाकिस्तान गुस्से में अटका है।”
Mehjabeen Khan (25): “हम सद्भाव में रहते हैं।”
Faisal Qadri (29): “शोर खत्म हो जाता है।”
Rumana Begum (38): “राष्ट्र अडिग है।”
Shahrukh Alam (21): “युवा एकजुट हैं।”
Nusrat Jahan (32): “आतंक अस्वीकार्य है।”
भारत का मुस्लिम युवा आतंक की भाषा को सिरे से नकार रहा है। यह सिर्फ rejection नहीं, बल्कि confidence और clarity का बयान है।
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