
आम आदमी पार्टी (AAP) को गोवा में उस वक्त बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी के पूर्व गोवा अध्यक्ष अमित पालेकर ने इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के साथ उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और गोवा स्टेट इंचार्ज आतिशी को एक कड़ी लेकिन मर्यादित चिट्ठी लिखी।
पालेकर ने साफ कहा कि उनका यह फैसला गुस्से में नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान को ध्यान में रखकर लिया गया है।
Kejriwal को लिखी चिट्ठी में क्या कहा?
अमित पालेकर ने लिखा कि वह राजनीति में “पद या सत्ता” के लिए नहीं आए थे, बल्कि उस Alternative Political Culture के वादे से जुड़े थे जिसमें— ट्रांसपेरेंसी, Internal Democracy, सवाल पूछने वालों की इज्जत की बात की जाती थी।
लेकिन जब बातचीत कम और फैसले ऊपर से थोपे जाने लगें, तो इससे लोग नहीं, **संस्थाएं कमजोर होती हैं।
“जिस आंदोलन ने लोकतांत्रिक राजनीति की नई परिभाषा गढ़ने का दावा किया था, उसके लिए यह स्थिति बेहद निराशाजनक है।”
— अमित पालेकर
आंदोलन बनाम मैनेजमेंट
AAP जिस Bottom-Up Politics का दावा करती रही, गोवा में तस्वीर कुछ और ही निकली। यहां सवाल ये नहीं कि चुनाव क्यों हारे, सवाल ये है कि हार की जिम्मेदारी किस पर डाली गई?
जब District Panchayat Election में नतीजे खराब आए, तो पूरा ठीकरा एक चेहरे पर फोड़ दिया गया। Alternative Politics जब Accountability से भागे, तो वह भी वही Old School Politics बन जाती है—बस branding नई होती है।

District Panchayat Election: Numbers जो चुभते हैं
दिसंबर में हुए जिला पंचायत चुनावों में AAP का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा:
- कुल सीटें: 50
- AAP ने लड़ीं: 42
- जीतीं: सिर्फ 1
वहीं—
- BJP: 29 सीटें
- MGP (BJP ally): 3 सीटें
इसके बाद AAP ने अमित पालेकर को गोवा चीफ पद से हटाया और उनकी जगह श्रीकृष्ण परब को नियुक्त किया। यहीं से असंतोष अंदर ही अंदर पकता चला गया।
Workers, Self-Respect और Exit Decision
पालेकर ने चिट्ठी में यह भी लिखा कि उन्होंने— पूरी ईमानदारी से संगठन के लिए काम किया। निस्वार्थ कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया। और अंत में यह फैसला अपने साथियों और सेंट क्रूज विधानसभा क्षेत्र के लोगों को ध्यान में रखते हुए लिया।
AAP के लिए Warning Bell?
गोवा कोई पहला राज्य नहीं है जहां Internal Democracy vs Centralised Control की बहस उठी हो। लेकिन पालेकर का इस्तीफा यह साफ संकेत देता है कि—अगर पार्टी के अंदर “संवाद” की जगह “आदेश” लेंगे, तो संगठन चुनाव से पहले अंदर से टूटेगा।
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