
बांग्लादेश में हालात एक बार फिर काबू से बाहर होते दिख रहे हैं। राजधानी ढाका में बुधवार रात हुआ बम विस्फोट सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि उस सुलगती राजनीति की याद दिलाता है, जो कभी भी आग पकड़ सकती है। इस धमाके में एक युवक की मौत हो गई, और इसके बाद शहर का माहौल फिर तनावपूर्ण हो गया।
जहां राजनीति को ठंडा होना चाहिए था, वहीं ज़मीन पर बारूद गरम हो गया।
बम धमाका और गुस्साई भीड़: यूनिवर्सिटी भी नहीं बची
धमाके के बाद हालात और बिगड़ गए। गुस्साई भीड़ ने ढाका यूनिवर्सिटी में घुसकर तोड़फोड़ शुरू कर दी। इस दौरान धार्मिक नारे लगाए गए। ‘अल्लाहु अकबर’ की गूंज सुनाई दी। और कवि काजी नजरुल इस्लाम की कविताएं पढ़ी गईं। भीड़ ने ‘चंद्रभांदर तोमारे ज्वाला मुक्ति’ का पाठ करते हुए संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ तोड़फोड़ नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति पर सीधा हमला है। जहां ज्ञान का घर होना चाहिए,
वहीं गुस्से ने कब्जा कर लिया।
मधुर कैंटीन: जहां आंदोलनों ने इतिहास बदला
तोड़फोड़ की शुरुआत हुई ढाका विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक मधुर कैंटीन से। यह वही जगह है— जो 1971 के मुक्ति संग्राम में छात्र आंदोलन का केंद्र रही। जहां से 2024 का जनआंदोलन शुरू हुआ। और जिसने शेख हसीना सरकार के पतन की कहानी लिखी।
आज उसी कैंटीन में टूटे शीशे और बिखरा हुआ इतिहास पड़ा है। जो जगहें क्रांति पैदा करती हैं, वही सबसे पहले निशाना बनती हैं।
17 साल बाद वतन वापसी: तारिक रहमान की Entry
इसी उथल-पुथल के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान 17 साल से ज्यादा के निर्वासन के बाद आज बांग्लादेश लौट आए हैं। उनकी फ्लाइट पहले सिलहट एयरपोर्ट पर लैंड हुई। इसके बाद वे ढाका के लिए रवाना होंगे। सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ गाड़ी तैनात। तारिक रहमान, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं और 2008 से लंदन में रह रहे थे।
चुनाव से पहले वापसी: संयोग या रणनीति?
12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों से ठीक पहले तारिक रहमान की वापसी को राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। उन पर भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों के आरोप हैं। वे इन्हें हमेशा “राजनीतिक साजिश” बताते रहे हैं। BNP का दावा है कि वे चुनावी तैयारियों के लिए लौटे हैं। BNP कार्यकर्ताओं में जश्न है, सड़कें नारों से भर गई हैं।

जहां आम जनता डर में है, वहीं राजनीति को मौका दिख रहा है।
तेज़ न्याय का दावा: दो मर्डर केस Speedy Trial में
इसी बीच सरकार ने उस्मान हादी और दीपू दास के मर्डर केस को Speedy Trial Tribunal में भेजने का फैसला किया है।
कानून सलाहकार आसिफ नजरुल के मुताबिक पुलिस रिपोर्ट के 90 दिनों में फैसला होगा। फैसला तेज़ है, लेकिन सवाल वही पुराना —
क्या इंसाफ भी उतना ही तेज़ होगा?
बांग्लादेश किस मोड़ पर खड़ा है?
ढाका में धमाका, यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़ और राजनीति में बड़े चेहरों की वापसी — ये सब संकेत हैं कि बांग्लादेश एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है। यह सिर्फ Law & Order की समस्या नहीं, यह सिस्टम, सियासत और सड़क — तीनों की परीक्षा है।
क्योंकि जब बम रात में फटें, यूनिवर्सिटी में पत्थर चलें और चुनाव नज़दीक हों तो सवाल सिर्फ यही रहता है — आम आदमी सुरक्षित है या नहीं?
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