
प्रयागराज में आज पॉलिटिकल थर्मामीटर थोड़ा ज़्यादा ही गर्म रहा, जब सपा से निष्कासित विधायक पूजा पाल ने डिप्टी CM रहे केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात कर दी। मुलाकात भी ऐसी—सीधी “touching feet” politics वाली।
वे हमारे परिवार के अभिभावक हैं—पूजा पाल
पूजा पाल ने मौर्य के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और कहा कि “वे हमारे परिवार के हैं, हमारे अभिभावक हैं।”
अब राजनीति में रिश्तों की ये मिठास, चाहे चीनी के रेट बढ़ जाएँ, कम नहीं होती। आदर-सत्कार का protocol अभी भी फुल-ऑन एक्टिव है।
Opposition Reaction: ‘Political Signal or Family Visit?’
प्रयागराज और लखनऊ के पॉलिटिकल गलियारों में चर्चा छिड़ गई— क्या ये मुलाकात एक simple family gesture थी?
या फिर कोई new political alignment का ट्रेलर?
राजनीति में कुछ भी पक्का नहीं होता—बस फोटो पक्का हो जाता है।

क्यों है ये मुलाकात महत्वपूर्ण?
- पूजा पाल सपा से निष्कासित
- प्रयागराज की राजनीति में उनका प्रभाव
- केशव प्रसाद मौर्य का OBC पॉलिटिक्स में महत्व
- चुनावी मौसम नज़दीक—connections matter!
राजनीति में “आज का गार्जियन, कल का पार्टी गार्जियन”—ये कॉन्सेप्ट नया नहीं है।
ये मुलाकात सिर्फ मुलाकात नहीं— एक पॉलिटिकल स्टोरीलाइन है, जिसके आगे वाले एपिसोड का इंतज़ार जनता को है।
“Flight लेट? No Tension! Goa Airport को Garba Ground बना दिया!”
