
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ऐसा आदेश जारी किया है जिसने पूरे सरकारी कर्मचारी वर्ग में खलबली मचा दी है। अब प्रदेश के सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी—यहाँ तक कि स्वायत्त संस्थान, निगम और उपक्रमों तक—को अपनी चल-अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा Human Samagra Portal पर अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा।
सरकार कह रही है—“ट्रांस्परेंसी चाहिए भाई, बस!”
और कर्मचारी कह रहे हैं—“इतना भी ट्रांसपेरेंट हो गए तो दिखेगा क्या?”
डेडलाइन और नियम: किसको क्या करना है?
Human Samagra Portal पर संपत्ति दर्ज करने का विकल्प शुरू होगा: 1 जनवरी 2026, आख़िरी तारीख: 1 फरवरी 2026, मिस कर दिया? प्रमोशन रुक जाएगा। न मानने पर एक्शन: कर्मचारी आचरण नियमावली 1999 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाही।
यानी सरकार की भाषा में—“पहले पारदर्शिता, बाद में तरक्की।”
आदेश क्यों जारी हुआ?
सरकार का तर्क साफ है— भ्रष्टाचार पर लगाम सिस्टम में पारदर्शिता कौन कितनी दौलत कमा रहा है—इसका रिकॉर्ड प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत सरकार की नज़र में यह “Better Governance” है…और कुछ कर्मचारियों की नज़र में यह “गवर्नेंस plus एक्स-रे मशीन” है।
किस पर लागू होगा यह आदेश?
यह नियम लागू होगा- सभी सरकारी अधिकारी सभी कर्मचारी निगम, उपक्रम, स्वायत्त संस्थान विभागों के प्रमुख सचिव, DGP, सचिव, PSC अधिकारी यानी—जो भी सरकार की सैलरी लेता है, सब पर लागू।

कुछ विभाग जिन्हें पहले छूट मिली थी—वह जारी रहेगी… जब तक नया आदेश न आए।
“संपत्ति नहीं बताई तो फाइल भी नहीं बढ़ेगी!”
कार्यालयों में मज़ाक चल रहा है— “अब प्रमोशन इंटरव्यू में पूछेंगे—कितना काम किया नहीं, कितनी जायदाद बताई?”
“नया साल, नई शुरुआत—नौकरी करने से पहले संपत्ति बताओ!”
यह आदेश सरकार का एक बड़ा कदम है जो— पारदर्शिता बढ़ाएगा, प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करेगा, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाएगा तो अगर आप UP में सरकारी नौकरी करते हैं—Human Samagra Portal Bookmark कर लीजिए।
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