RJD में महा-संग्राम! हार के बाद तेजस्वी की कोर टीम पर निशाना

Ajay Gupta
Ajay Gupta

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन को जोरदार झटका लगा है।
जहां 2015 और 2020 में RJD सबसे बड़ी पार्टी रही थी, वहीं इस बार पार्टी महज़ 25 सीटों पर सिमट गई, और इसी हार ने पार्टी के भीतर महा-संग्राम छेड़ दिया है।

ताज़ा समीक्षा बैठकों में हारे हुए उम्मीदवारों ने तेजस्वी यादव की कोर टीम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इतना ही नहीं, महागठबंधन के सहयोगी दलों—कांग्रेस, लेफ्ट, VIP, IIP—पर भी उंगली उठाई गई है।

‘सहयोगियों से मिला ही नहीं सहयोग’—RJD नेताओं का आरोप

हालिया समीक्षा बैठक में हारे हुए RJD नेता खुलकर बोले। उनका कहना है गठबंधन सहयोगियों ने पूरी ताकत नहीं लगाई, महागठबंधन रणनीति पर एकजुटता दिखाने में कमी रही। कई सीटों पर सहयोगी दलों की निष्क्रियता सीधे परिणामों में दिखाई दी। यह आरोप महागठबंधन की एकजुट लड़ाई पर बड़े सवाल खड़े करता है।

कोर टीम पर निशाना: खराब मैनेजमेंट बना हार की वजह?

मगध प्रमंडल की समीक्षा बैठक में नेताओं ने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव की कोर टीम ने मैदान पर ठीक तरह से समन्वय नहीं किया। टिकट वितरण से लेकर बूथ लेवल स्ट्रैटेजी में कुप्रबंधन दिखा। संगठन के भीतर संचार और संपर्क में बड़ी दराज़ पैदा हो गई। इन मुद्दों को हार का सबसे बड़ा कारण बताया गया है।

आज सारण प्रमंडल की समीक्षा—और खुलासों की उम्मीद

आज (28 नवंबर) सारण प्रमंडल की सीटों की समीक्षा बैठक होने वाली है। पार्टी नेताओं का मानना है कि आज की बैठक में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। RJD की समीक्षा बैठकें 9 दिसंबर तक चलेंगी, यानी पार्टी के अंदर का घमासान अभी थमने वाला नहीं है।

कांग्रेस भी कर चुकी है समीक्षा, पर RJD में विवाद गहरा

गौरतलब है, कांग्रेस ने पहले ही अपनी समीक्षा बैठक कर ली है। लेकिन RJD में जिस तीखेपन के साथ कोर टीम, सहयोगी दल और चुनावी रणनीति।

पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसने बिहार की राजनीति में नई हलचल मचा दी है

तेजस्वी यादव के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है— संगठन को फिर से एकजुट करना और बिखरते भरोसे को जोड़ना।

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