
कटिहार के कदवा की भीड़ में प्रियंका गांधी ने जैसे ही माइक संभाला, माहौल गरम हो गया। बोलीं — “देश में वोट चोरी हो रही है, और इसमें तीन लोग मदद कर रहे हैं — ज्ञानेश कुमार, विवेक जोशी और एसएस संधू। ये वही हैं जो चुनाव आयोग में बैठे हैं, लेकिन संविधान की नहीं सुन रहे।”
उनका निशाना साफ था — चुनाव आयोग और केंद्र सरकार दोनों पर। प्रियंका ने कहा कि “इन अफसरों ने 65 लाख वोटर लिस्ट से नाम काट दिए हैं।”
यानी एक तरह से चुनावी ‘डिलीट ऑपरेशन’ चल गया है, जिसमें लोकतंत्र खुद स्पैम में चला गया।
“रिटायरमेंट के बाद आराम नहीं, जवाब दो!”
प्रियंका का बयान सिर्फ हमला नहीं था, एक चेतावनी भी थी। उन्होंने कहा — “क्या ये लोग रिटायर होकर चैन से बैठेंगे? जिन्होंने संविधान से धोखा किया है, उन्हें याद रखना चाहिए।”
यह लाइन सुनकर भीड़ ने तालियाँ बजाईं — और विपक्ष को नया नारा मिल गया:
“तीन नाम याद रखो — ज्ञानेश, विवेक और संधू।”
राहुल गांधी का ‘डेटा प्रेजेंटेशन’ और वोट चोरी का मुद्दा
प्रियंका से पहले राहुल गांधी भी “वोट चोरी” का मुद्दा उठा चुके हैं। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने हरियाणा की वोटिंग लिस्ट में “गड़बड़ी” का आरोप लगाया था। अब प्रियंका ने बिहार में वही बात दोहराई — और बिहार चुनाव को ‘लोकतंत्र बनाम धांधली’ के नैरेटिव में डाल दिया।

“वोट चोरी” नया रियलिटी शो!
देश में पहले रोड शो होते थे, अब वोट शो चल रहा है। हर पार्टी कह रही है — “हमारे वोट चोरी हुए।” ऐसे में जनता सोच रही है — “भाई, वोट चोरी हुए तो हमसे क्यों पूछ रहे हो? EVM से पूछो न!”
“कहीं EVM सो गई, कहीं सड़क रूठ गई!” 3 जिलों में मतदान का बहिष्कार
