
ढाका की मस्जिदों में ‘जिहाद चाहिए’ के नारे, आतंकियों की जमानत पर रिहाई और खुलेआम रैलियों का आयोजन अब ये जताता है कि हिज्ब उत-तहरीर, अंसार अल-इस्लाम, और जमात-ए-इस्लामी जैसे ब्रांड अब फिर से “मार्केट में एक्टिव” हो चुके हैं।
सॉरी इन्स्टा, अब बांग्लादेश की सड़कों पर चल रही है असली “जिहादी रील लाइफ”!
भारत के लिए नया Security Season?
पाकिस्तान की फिक्स्ड डोज़ मिल रही थी, अब बांग्लादेश ने भी “Bonus Attack Package” भेजने की तैयारी कर ली है। भारत की सीमाएं अब सिर्फ भौगोलिक नहीं, विचारधारात्मक भी असुरक्षित लग रही हैं।
भारत की रणनीति: सिर्फ कूटनीति से काम चलेगा?
“शांति के लिए हम प्रतिबद्ध हैं…लेकिन सीमा के उस पार से गोली आएगी तो जवाब माफीनामे से नहीं, मिसाइल से देंगे!” – हर भारतीय सोच।
भारत को चाहिए:
सीमाई सुरक्षा में ड्रोन और AI निगरानी
ISI व बांग्लादेशी नेटवर्क की इंटरसेप्टिंग
‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ छोड़ ‘हार्ड वार्निंग’ की रणनीति

पूर्वोत्तर राज्यों में आतंकी घुसपैठ रोकने के लिए 24×7 निगरानी
क्या भारत बांग्लादेश को चेतावनी देगा, या ‘UN’ से डांट दिलवाएगा?
भारत सरकार अब दो ही काम कर सकती है —
कड़ी चेतावनी और कूटनीतिक दवाब
और अगर कुछ न हुआ तो… टीवी डिबेट में कड़क प्रतिक्रिया!
वैसे भारत के पास एक ‘Final Option’ भी है – “टाइगर रिटर्न्स “ में सल्लू भाई को भेजना।
“पाकिस्तान की कहानी अधूरी थी, अब बांग्लादेश ने भी अपना चैप्टर जोड़ दिया है। भारत को अब सिर्फ डिफेंसिव नहीं, प्री-एम्प्टिव सोचना होगा।”
सत्ता बदली, बम फूटे! बांग्लादेश में फिर गूंजे ‘जिहाद चाहिए’ के नारे
