गंजमुरादाबाद, उन्नाव। नगर में स्थित दरगाह शरीफ की बड़ी मस्जिद में आज जुमा की नमाज के अवसर पर पेश इमाम मौलाना इब्राहिम अब्र ने नमाजियों को खिताब करते हुए समाज में दीनी तालीम की अहमियत पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि दुनियावी तालीम के साथ-साथ अपनी औलाद को दीनी तालीम दिलाना भी बेहद जरूरी है। माता-पिता की जिम्मेदारी केवल बच्चों को पढ़ा-लिखाकर अच्छी नौकरी और कारोबार के काबिल बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार, धार्मिक शिक्षा और नेक रास्ते पर चलने की सीख देना भी है।
मौलाना इब्राहिम अब्र ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में लोग दुनियावी तरक्की और दौलत कमाने की होड़ में लगे हुए हैं। हर व्यक्ति अपनी औलाद के बेहतर भविष्य के लिए अच्छी से अच्छी दुनियावी शिक्षा दिलाने और सुख-सुविधाएं मुहैया कराने की कोशिश करता है, जो जरूरी भी है। लेकिन इसी के साथ दीनी तालीम और धार्मिक संस्कारों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को नमाज, रोजा, कुरआन शरीफ की तालीम और इस्लाम की बुनियादी शिक्षाओं से परिचित कराना हर अभिभावक की अहम जिम्मेदारी है।
उन्होंने आगे कहा कि इंसान अपनी जिंदगी में दौलत, शोहरत और तमाम दुनियावी सुविधाएं हासिल करने के लिए काफी मेहनत करता है, लेकिन उसे यह भी याद रखना चाहिए कि दुनिया की जिंदगी हमेशा रहने वाली नहीं है। इसलिए अपनी औलाद की ऐसी तरबियत करें कि वह माता-पिता के लिए नेक और अच्छे इंसान साबित हों। उन्हें दीनी तालीम जरूर दें, ताकि आने वाली पीढ़ी धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं को समझ सके तथा अपने बुजुर्गों के लिए जनाजे की नमाज अदा करने और उनकी कब्र पर जाकर फातिहा पढ़ने की जानकारी व तरीका भी जान सके।
मौलाना ने समाज में बढ़ते गैरजरूरी खर्चों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आजकल लोग तमाम दुनियावी और गैरजरूरी कामों में खूब पैसा खर्च करते हैं, लेकिन जब दीन के नेक कामों, धार्मिक शिक्षा और बच्चों की दीनी तरबियत पर खर्च करने की बात आती है तो कई लोग पीछे हट जाते हैं। यह सोच बदलने की जरूरत है। हमें अपनी आमदनी का एक हिस्सा नेक और धार्मिक कार्यों में भी खर्च करना चाहिए तथा बच्चों की शिक्षा और अच्छे चरित्र के निर्माण को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी औलाद को केवल धन कमाने और दुनियावी कामयाबी हासिल करने की शिक्षा न दें, बल्कि उन्हें इंसानियत, अदब, अखलाक, बुजुर्गों का सम्मान और जरूरतमंदों की मदद करने की सीख भी दें। क्योंकि अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार ही एक बेहतर समाज की नींव रखते हैं।मौलाना इब्राहिम अब्र का यह संबोधन उपस्थित नमाजियों के लिए एक अहम संदेश रहा। इस अवसर पर दरगाह शरीफ की बड़ी मस्जिद में काफी तादाद में नमाजी मौजूद रहे।
