गंजमुरादाबाद, उन्नाव। नगर में चल रहे श्री राम लीला महोत्सव में आज तीसरे दिन अहिल्या उद्धार, नगर दर्शन, फुलवारी लीला का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम और लक्ष्मण अपने गुरु महर्षि विश्वामित्र के साथ जनकपुर की ओर जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक अत्यंत शांत, निर्जन और वीरान आश्रम दिखाई दिया। श्रीराम के पूछने पर महर्षि विश्वामित्र उन्हें बताते हैं कि यह स्थान महर्षि गौतम का आश्रम है।
विश्वामित्र जी बताते हैं कि किस प्रकार देवराज इंद्र के छल के कारण महर्षि गौतम के क्रोध से अहिल्या शापवश पाषाण (पत्थर की शिला) बन गई थीं। महर्षि ने उन्हें शाप दिया था कि त्रेतायुग में अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम के चरणों की धूल (चरण-स्पर्श) पाकर ही तुम्हारा उद्धार होगा। जैसे ही श्रीराम के चरणों की धूल या स्पर्श उस शिला पर पड़ता है, अहिल्या का शाप समाप्त हो जाता है और वो अपने दिव्य स्वरूप में प्रकट होती हैं।
अहिल्या प्रभु श्रीराम की स्तुति करती हैं और उन्हें सादर प्रणाम करती हैं। इसके बाद महर्षि गौतम से उनका पुनर्मिलन होता है और श्रीराम-लक्ष्मण आगे जनकपुर की ओर प्रस्थान करते हैं। नगर दर्शन करने के बाद पुष्प वाटिका में फूल तोड़ने जाते हैं जहां माता सीता भी गौरी पूजन हेतु आती है।
रामलीला के मंचन के दौरान इस प्रसंग में भक्ति संगीत, ढोल-नगाड़ों और “जय श्री राम” के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठता है। इस अवसर पर श्री राम लीला समिति के पदाधिकारियों सहित बहुत बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे।
