देहरादून: उत्तराखंड कैबिनेट ने राष्ट्रीय सहकारी नीति के अनुरूप राज्य की नई सहकारी नीति को मंजूरी दे दी है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2036 तक सहकारिता के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाना तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता को गति देना है। यह नीति तीन चरणों में लागू की जाएगी और इसके तहत सहकारिता से जुड़े कामकाज को सात प्रमुख रणनीतिक स्तंभों के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
गांवों में सहकारिता को मिलेगा नया स्वरूप
नई नीति के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पेक्स) को बहुद्देशीय ग्रामीण आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इनके माध्यम से कृषि, उद्यान, डेयरी, मत्स्य पालन, भंडारण, कोल्ड-चेन, प्राथमिक प्रसंस्करण, कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध कराने, बीमा, पेंशन और डिजिटल बैंकिंग जैसी सेवाओं को सहकारी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। हिमालयी उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए क्लस्टर आधारित व्यवस्था को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
नीति में सहकारिता की बुनियाद मजबूत करने के साथ संस्थाओं को सक्रिय बनाने, भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने, समावेशी विकास, नए क्षेत्रों में विस्तार, युवाओं की भागीदारी, आर्थिक व्यवहार्यता और विविधीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
महिलाओं और युवाओं के लिए बढ़ेंगे अवसर
सरकार ने महिलाओं और युवाओं को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने के लिए महिला सहकारी समितियों, सहकारी स्टार्टअप, इंटर्नशिप, कौशल विकास और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। पर्यटन, होमस्टे, ईको टूरिज्म, आयुष, सौर ऊर्जा, जैविक खेती, कार्बन क्रेडिट, वन उत्पाद, स्वास्थ्य, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हस्तशिल्प और परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी सहकारी मॉडल विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही ‘सहकार टैक्सी’ को बढ़ावा देने की योजना है।
पलायन रोकने पर भी रहेगा फोकस
ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम को सहकारिता से जोड़ा जाएगा। दुर्गम इलाकों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए हब एंड स्पोक मॉडल अपनाया जाएगा। सहकारी संस्थाओं में कागजरहित कामकाज, वास्तविक समय पर लेखांकन, डिजिटल बैंकिंग, क्लाउड आधारित केंद्रीय बैंकिंग प्रणाली और डिजिटल डैशबोर्ड से निगरानी को बढ़ावा दिया जाएगा। सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत के अनुसार, उत्तराखंड अपने विशिष्ट ‘हिमालयी सहकारिता मॉडल’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
टीडीसी के 85 कर्मचारियों को दूसरे विभागों में भेजने की मंजूरी
कैबिनेट ने उत्तराखंड बीज एवं तराई विकास निगम लिमिटेड में कार्यरत 85 कर्मचारियों के सेवा स्थानांतरण का रास्ता भी साफ किया है। इनमें तृतीय श्रेणी के 22 और चतुर्थ श्रेणी के 63 कर्मचारी शामिल हैं। इन्हें नैनीताल और ऊधम सिंह नगर जिलों में दूसरे विभागों में भेजा जा सकेगा।
टीडीसी में इन कर्मचारियों की उपयोगिता मौसमी होने के कारण सरकार ने यह फैसला लिया है। कर्मचारियों को अधिकतम 10 वर्ष या सेवानिवृत्ति से तीन महीने पहले तक दूसरे विभागों में रखा जा सकेगा। इस अवधि में संबंधित विभाग उनका वेतन देंगे, जबकि सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ टीडीसी की ओर से दिए जाएंगे। सरकार को उम्मीद है कि इससे निगम को हर साल हो रहे घाटे को कम करने में मदद मिलेगी।
यूयूएसडीए में 94 पदों के सृजन को मंजूरी
कैबिनेट ने उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट एजेंसी के ढांचे में 94 स्थायी निस्संवर्गीय पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है। इससे कोटद्वार, चंपावत, टनकपुर, किच्छा, पिथौरागढ़, रुद्रपुर, काशीपुर और सितारगंज नगर निकायों में विभिन्न विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
इन परियोजनाओं में एशियाई विकास बैंक और यूरोपीय निवेश बैंक से वित्त पोषित पेयजल एवं सीवेज योजनाएं शामिल हैं। वहीं ऋषिकेश में जर्मन बैंक केएफडब्ल्यू से वित्त पोषित सड़क, सीवेज, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन, पेयजल और घाटों के सुंदरीकरण से जुड़े कार्यों को भी इन व्यवस्थाओं से गति मिलेगी।
