US-ईरान समझौते का भारत को बड़ा फायदा! होर्मुज से निकले 11 भारतीय जहाज, तेल-गैस सप्लाई पटरी पर लौटने के संकेत

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने को लेकर हुए समझौते के बाद भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक लेकर भारत की ओर आ रहे 11 व्यापारिक जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। इसके साथ ही भारत से फारस की खाड़ी की दिशा में दो अन्य जहाज भी रवाना हो गए हैं। इस घटनाक्रम को क्षेत्र में समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के सामान्य होने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

होर्मुज में फिर शुरू हुई सामान्य आवाजाही

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित प्रेस वार्ता में बताया कि दोनों दिशाओं में जहाजों की आवाजाही शुरू होना इस बात का संकेत है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन पर लगी बाधाएं हट रही हैं। लंबे समय से प्रभावित समुद्री मार्ग के फिर से खुलने से ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

14 सूत्रीय समझौते के बाद बदले हालात

17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके बाद क्षेत्र में तनाव कम होने की प्रक्रिया शुरू हुई। फरवरी के अंत में संघर्ष बढ़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हो गई थीं। इस दौरान भारत के 10 ध्वजवाहक जहाज भी क्षेत्र में फंसे हुए थे। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उन्हें भी जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा।

क्या फिर शुरू होगा ईरान से तेल आयात?

विदेश मंत्रालय से जब यह सवाल पूछा गया कि प्रतिबंधों में संभावित ढील के बाद क्या भारत फिर से ईरान से तेल खरीदना शुरू करेगा, तो मंत्रालय ने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। सरकार का लक्ष्य देश की 140 करोड़ आबादी को विभिन्न स्रोतों से किफायती और सुरक्षित ऊर्जा उपलब्ध कराना है। ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े सभी विकल्पों का मूल्यांकन राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

भारत के लिए क्यों अहम है ईरान?

अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले ईरान भारत के प्रमुख ऊर्जा साझेदारों में शामिल था। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में गिने जाने वाले ईरान से भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता था। वित्त वर्ष 2009-10 में भारत ने ईरान से 22.1 मिलियन टन कच्चे तेल का आयात किया था, जो उस समय कुल तेल आयात का लगभग 14 प्रतिशत था।

ईरान लंबे समय तक भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रहा और दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत संबंध रहे हैं। ईरानी नेतृत्व कई बार सार्वजनिक रूप से यह कह चुका है कि वह भारत को तेल आपूर्ति फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत की नजर

मार्च में अमेरिका द्वारा कुछ प्रतिबंधों में सीमित अवधि की राहत दिए जाने के बाद भारत ने अप्रैल में ईरान से सीमित मात्रा में तेल आयात किया था। सूत्रों के अनुसार भारत ईरान और अमेरिका के बीच जारी वार्ताओं तथा भविष्य की व्यवस्थाओं पर करीबी नजर रखे हुए है।

रूस बना सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता

वर्तमान समय में भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है। वित्त वर्ष 2026 में देश ने लगभग 123 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा। हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, जो जून में लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम हुई है। हाल के वर्षों में अमेरिका भी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है।

भारत की ऊर्जा आपूर्ति को मिल सकती है नई मजबूती

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने से भारत के लिए कच्चे तेल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति सुचारु होने की उम्मीद बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहती है तो ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और आयात लागत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

 

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