
उत्तर प्रदेश में समान और सुलभ न्याय की दिशा में आज एक बार फिर बड़ा कदम उठाया गया जब जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में अतिरिक्त हाई कोर्ट बेंचों की स्थापना की पुरज़ोर मांग दोहराई।
पहले भी उठ चुकी है यह मांग
यह पत्र 21 नवंबर 2024 को भेजे गए उनके पूर्व पत्र (पत्र संख्या 5003) की याद दिलाता है, जिसमें सिंह ने यूपी की विशाल जनसंख्या और लाखों लंबित मामलों की ओर ध्यान दिलाया था।
“उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में केवल दो हाई कोर्ट पीठों का होना न्याय व्यवस्था के साथ अन्याय है।” — धीरेंद्र सिंह
यूपी बनाम अन्य राज्य: खंडपीठों की असमानता
सिंह ने पत्र में लिखा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कई खंडपीठें पहले से हैं। हाल ही में महाराष्ट्र को एक नई पीठ की स्वीकृति भी मिली है, जबकि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में अभी भी केवल प्रयागराज और लखनऊ में ही हाई कोर्ट की पीठें हैं।
“दूरी और खर्च बना न्याय का दुश्मन”
धीरेंद्र सिंह का मानना है कि मेरठ, गोरखपुर, झांसी, आगरा और गौतम बुध नगर जैसे क्षेत्र दिल्ली से सटे और विकासशील होने के बावजूद न्याय की पहुंच से कोसों दूर हैं।
“न्याय पाने में जितनी देरी, उतना ही विकास में रुकावट — चाहे वो ज़मीन अधिग्रहण हो या नागरिक विवाद।” — विधायक
विधानसभा से प्रधानमंत्री तक की यात्रा
यह कोई तात्कालिक मुद्दा नहीं है। सिंह ने इसे उत्तर प्रदेश विधानसभा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष भी रखा है। उन्होंने कहा कि 1 करोड़ से अधिक लंबित केस यूपी में न्याय प्रणाली की गंभीर स्थिति दर्शाते हैं।
प्रधानमंत्री से अपील: न्याय मंत्रालय को दें निर्देश
विधायक ने आग्रह किया है कि प्रधानमंत्री मोदी न्याय मंत्रालय को निर्देश दें कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हाई कोर्ट की नई खंडपीठें शीघ्र स्थापित की जाएं।
“न्याय सस्ता हो, सबका हो, पास हो”
धीरेंद्र सिंह की मांग महज़ एक पत्र नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा — समान न्याय के मूल अधिकार की पुकार है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां जनसंख्या देश की सबसे अधिक है, वहाँ न्याय की दूरी किसी अपराध से कम नहीं।
“खंडपीठों की स्थापना सिर्फ कोर्ट नहीं, आम जनता के हक की वापसी होगी।”
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