
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी से राजनीतिक मोर्चेबंदी तेज कर दी है।
जाति, वर्ग और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए यूपी कैबिनेट विस्तार को अब चुनावी रणनीति का अहम हथियार माना जा रहा है।
दिल्ली में योगी, दिल्ली में संदेश
सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। करीब एक घंटे चली इस वन-टू-वन मीटिंग में यूपी की राजनीति, संगठनात्मक समीकरण और खासतौर पर कैबिनेट विस्तार पर गहन चर्चा हुई।
पहले माना जा रहा था कि विस्तार मार्च तक होगा, लेकिन अब संकेत हैं कि मकर संक्रांति से पहले मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है।
Cabinet Expansion = Social Engineering?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह विस्तार सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि social engineering का फॉर्मूला होगा।
BJP की नजर खासतौर पर:
- OBC
- Dalit
- Non-Yadav OBC
- Regional caste blocks
पर है, ताकि 2027 से पहले हर वर्ग को representation का signal दिया जा सके।
मोदी–योगी मीटिंग: संदेश संगठन तक
सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात में BJP हाईकमान की अपेक्षाएं। राज्य सरकार का परफॉर्मेंस। संगठन और सरकार के बीच तालमेल जैसे मुद्दों पर भी बात हुई।
साफ है—दिल्ली से लखनऊ तक लाइन क्लियर की जा रही है।

मंत्रिमंडल नहीं, चुनावी शतरंज
यूपी की राजनीति में कैबिनेट विस्तार सिर्फ कुर्सियों का खेल नहीं होता। यहां हर मंत्री एक वोट बैंक एक जातीय गणित और एक चुनावी संदेश होता है।
यानी यह “Cabinet Expansion” नहीं, बल्कि 2027 की Chessboard पर पहली चाल मानी जा रही है।
आगे क्या?
अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि किन चेहरों को मिलेगा मौका? किस वर्ग को साधेगी BJP? और कौन होगा बाहर?
मकर संक्रांति सिर्फ पर्व नहीं, राजनीतिक संकेतों की तारीख भी बन सकती है।
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