
उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगुल अब औपचारिक रूप से बज चुका है। 2027 विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट पेश कर यह साफ कर दिया है कि यह सिर्फ वित्तीय दस्तावेज़ नहीं, बल्कि राजनीतिक रोडमैप भी है।
कैबिनेट की मुहर के साथ यूपी अब ₹9 लाख करोड़ से अधिक के अब तक के सबसे बड़े बजट की दहलीज पर खड़ा है। सरकार इसे “विकास का दशक” बता रही है, जबकि विपक्ष इसे “वोट मैनेजमेंट का मास्टरप्लान” कहकर घेरने की तैयारी में है।
बजट का साइज क्यों है इतना बड़ा?
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में आंकड़ों की ऐसी झड़ी लगाई, जो सीधे 2016 की याद दिलाती है।
- 2016–17: ₹3.47 लाख करोड़
- 2026–27: ₹9 लाख करोड़+
सरकार का दावा है कि 9 सालों में ₹4.86 लाख करोड़ की बढ़ोतरी सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि नीति, कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार का नतीजा है।
Double Engine Government का जिक्र यहां बार-बार सुनाई देता है—मतलब दिल्ली और लखनऊ एक ही ट्रैक पर।
किसान: गन्ने से गेहूं तक ‘सेफ वोट बैंक’
योगी सरकार जानती है कि यूपी में किसान नाराज़ हुआ, तो सत्ता डगमगाती है। इसलिए बजट का बड़ा हिस्सा कृषि-सुरक्षा कवच की तरह पेश किया गया। ₹3.04 लाख करोड़ गन्ना भुगतान (रिकॉर्ड), 2025–26 में ₹30 प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य बढ़ोतरी, गेहूं, धान, बाजरा—हर फसल की खरीद के आंकड़े गिनाए गए।
सरकार का संदेश साफ है “हमने किसान को भाषण नहीं, भुगतान दिया है।”
महिला एजेंडा: सुरक्षा से स्वावलंबन तक
इस बजट में महिलाएं सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति की धुरी बनाई गई हैं। BC सखी मॉडल से गांवों में आर्थिक भागीदारी। Mission Shakti + Safe City से सुरक्षा का नैरेटिव। Working Women Hostel और Skill सेंटर्स। जनवरी 2026 तक 26.81 लाख बालिकाओं को सुमंगला योजना का लाभ—यह आंकड़ा चुनावी मंचों पर सबसे ज्यादा गूंजने वाला है।
राजनीतिक भाषा में कहें तो महिलाएं अब सिर्फ वोट नहीं, निर्णायक फैक्टर हैं।
युवा और रोजगार: स्किल, स्टार्टअप और स्मार्टफोन
यूपी का सबसे बड़ा सवाल—नौकरी। सरकार ने इसे तीन स्तरों पर टैकल करने की कोशिश की है।

Skill
- 9.25 लाख युवाओं को ट्रेनिंग
- PPP मॉडल पर नए Skill + Job Centers
Startup & Enterprise
- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान
- बिना गारंटी, बिना ब्याज लोन
Digital Push
- 49.86 लाख टैबलेट/स्मार्टफोन
- युवाओं को “Digital Workforce” बनाने की कोशिश
सरकार कहती है—डिग्री काफी नहीं, स्किल जरूरी है।
इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़क, बिजली और इंडस्ट्री
बजट में Capital Expenditure की भारी बढ़ोतरी यह दिखाती है कि सरकार 2027 से आगे की सोच रही है।
- एक्सप्रेसवे + एयरपोर्ट नेटवर्क
- 9,120 मेगावॉट थर्मल पावर
- 2,815 मेगावॉट सोलर एनर्जी
नीति आयोग के Export Preparedness Index में यूपी का टॉप पर पहुंचना सरकार के लिए बड़ा नैरेटिव हथियार है।
निवेश: आंकड़ों की राजनीति
योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया ₹50 लाख करोड़ के MoUs, ₹15 लाख करोड़ की 16,000+ परियोजनाएं जमीन पर। 10 लाख संभावित नौकरियां।
सरकार का दावा है कि बेहतर कानून-व्यवस्था ने यूपी को “Investment Risk State” से “Investment Ready State” बना दिया।
गरीबी, आय और ग्रोथ
- GSDP: ₹30.25 लाख करोड़
- ग्रोथ: 13.4%
- प्रति व्यक्ति आय: ₹54,564 – ₹1,09,844 – ₹1,20,000 (अनुमान)
सरकार कहती है—6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। विपक्ष पूछता है—महंगाई किस कैलकुलेशन में शामिल है?
सरकार: यूपी उड़ान भर रहा है। विपक्ष: टिकट महंगा हो गया है। बजट 2026 में विकास और राजनीति दोनों समान गति से दौड़ रहे हैं।
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