
तुर्की की प्रथम महिला एमीन अर्दोआन ने अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप को एक भावुक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने ग़ज़ा में बच्चों की दुर्दशा को लेकर चिंता जताई है और आग्रह किया है कि वे इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से इस मुद्दे पर बातचीत करें।
यूक्रेन के बच्चों से ग़ज़ा के बच्चों तक — एक मानवीय जुड़ाव
एमीन अर्दोआन ने अपने पत्र में लिखा कि उन्हें प्रेरणा उस समय मिली जब मेलानिया ट्रंप ने हाल ही में रूसी राष्ट्रपति पुतिन को यूक्रेनी बच्चों को लेकर एक पत्र भेजा था।
“मुझे विश्वास है कि आपने 648 यूक्रेनी बच्चों के लिए जो संवेदनशीलता दिखाई है, वही ग़ज़ा के लिए भी दिखाई जाएगी।” — एमीन अर्दोआन
“ग़ज़ा की आवाज़ बनें मेलानिया” — एक ऐतिहासिक अपील
पत्र में उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान दौर में जब फ़लस्तीन की मान्यता एक वैश्विक मांग बन गई है, “मेरा मानना है कि ग़ज़ा की ओर से आपका आह्वान फ़लस्तीनी लोगों के प्रति एक ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी को पूरा करेगा।”
तुर्की राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा इस पत्र की पुष्टि की गई, लेकिन व्हाइट हाउस की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ग़ज़ा में अब ‘अकाल’ घोषित, भूख और बम दोनों से संकट
एक वैश्विक भूख निगरानी संस्था की रिपोर्ट के अनुसार, ग़ज़ा सिटी और आसपास के क्षेत्र आधिकारिक रूप से अकाल की चपेट में आ चुके हैं, और हालात और बिगड़ने की आशंका है।
इधर ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि अब तक 62,000 से अधिक फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे हैं।
नेतन्याहू ने रिपोर्ट को बताया “झूठ”
इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस रिपोर्ट को “सरासर झूठ” बताया और कहा कि

“इसराइल की नीति भूख पैदा करने की नहीं, उसे रोकने की है।”
हालांकि, ज़मीनी हालात और तस्वीरें कुछ और ही बयान कर रही हैं, जिनमें तबाह हुए रिहायशी इलाके, अस्पताल और स्कूल शामिल हैं।
युद्ध की शुरुआत और गिनती बंद मौतें
ग़ज़ा में यह युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को तब शुरू हुआ जब हमास ने इसराइल में 1,200 लोगों की हत्या की और 250 लोगों को बंधक बना लिया।
तब से अब तक हालात लगातार बिगड़ते गए, और अब मानवीय आपदा की स्थिति बन चुकी है।
एक महिला से दूसरी महिला तक — ग़ज़ा के बच्चों की उम्मीदें
एमीन अर्दोआन का पत्र सिर्फ एक राजनीतिक अपील नहीं, बल्कि एक मानवीय गुहार है — ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रभावशाली चेहरे ग़ज़ा के मासूमों के लिए आवाज़ बनें।
अब देखने वाली बात होगी कि क्या मेलानिया ट्रंप इस संदेश को आगे बढ़ाती हैं, या यह भी कूटनीति के शोर में दब जाएगा।
“युद्ध नहीं, जीवन चाहिए!” इसराइल में ग़ज़ा युद्धविराम को लेकर उबाल
