
बिहार की राजनीति में एक बार फिर तेज प्रताप यादव चर्चा के केंद्र में हैं, लेकिन इस बार मुद्दा भाषण नहीं, खाली किया गया सरकारी बंगला है।
नीतीश सरकार में आवास मंत्री लखेंद्र पासवान ने आरोप लगाया है कि उन्हें जो बंगला अलॉट हुआ है, वह रहने लायक ही नहीं बचा।
मंत्री का दावा है कि बंगले से पंखे, एसी, बल्ब और फर्नीचर तक गायब हैं। इतना ही नहीं, छत टूटी हुई है, गेट क्षतिग्रस्त हैं और कुल मिलाकर हालात ऐसे हैं कि बिना मरम्मत वहां कदम रखना भी मुश्किल है।
“बंगला नहीं, कंस्ट्रक्शन साइट लग रहा है”
लखेंद्र पासवान ने कहा कि 26 एम स्ट्रैंड रोड स्थित यह बंगला कागजों में भले सरकारी आवास हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है।
“जब तक मरम्मत नहीं होती, वहां रहना संभव नहीं है।”
उन्होंने पूरे मामले की जानकारी भवन निर्माण विभाग को दे दी है। विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर बंगले की स्थिति का निरीक्षण भी किया।
सामान गया कहां? रिपोर्ट्स में नया ट्विस्ट
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बंगले से हटाया गया सामान किसी दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। हालांकि, इस पूरे विवाद पर तेज प्रताप यादव की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

चुप्पी ने सियासी अटकलों को और हवा दे दी है।
हार के बाद खाली करना पड़ा था बंगला
गौरतलब है कि तेज प्रताप यादव महुआ विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे। इसके बाद 25 नवंबर 2025 को उन्हें सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया गया था। इसी के साथ उनकी मां राबड़ी देवी को भी आवास खाली करने का निर्देश मिला था।
बिहार की राजनीति में सवाल अब ये नहीं है कि “बंगला किसे मिला?” बल्कि ये है कि “बंगले में आखिर बचा क्या?”
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