1960 का दशक — जब सिनेमा में इमोशन, शालीनता और संगीत का स्वर्ण युग था। इसी दौर में आई किशोर साहू की क्लासिक ड्रामा फिल्म ‘दिल अपना और प्रीत पराई’, जहां राजकुमार का गंभीर चेहरा, मीना कुमारी की नम आँखें और नादिरा की जलन भरी मुस्कान ने मोहब्बत को एक मेडिकल मेटाफर में बदल दिया। कहानी — जब ड्यूटी और दिल में हुआ टकराव डॉ. सुशील वर्मा (राजकुमार) एक सर्जन हैं, जो अपने परिवार और जिम्मेदारियों में उलझे हैं। उनकी जिंदगी में आती है करुणा (मीना कुमारी) — एक नर्स…
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आवारा (1951): “आवारा हूँ”… और पूरी दुनिया दीवानी हो गई!
1951 में जब राज कपूर ने “आवारा” बनाई, तो शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि ये फिल्म एक इंटरनेशनल लव अफेयर में बदल जाएगी। फिल्म में एक गरीब चोर, एक हाई-सोसाइटी लॉ स्टूडेंट, और एक कट्टरपंथी जज की तिकड़ी ने जो सोशल ड्रामा रचा, वो आज भी यादगार है। जज साहब बोले: “अपराधी का बेटा अपराधी!” कहानी शुरू होती है एक ज़िला न्यायाधीश रघुनाथ से, जिनकी थ्योरी है – DNA ही destiny है! लेकिन जब उनके अपने बेटे ने चोर बनकर उनके सिद्धांत की वाट लगा दी, तो मजनू…
Read MoreSuraj (1966) Movie Review: राजेंद्र कुमार की आखिरी सुपरहिट
टी. प्रकाश राव के निर्देशन में बनी फिल्म ‘सूरज’, राजसी प्रेम कहानी को उस दौर की मसालेदार बॉलीवुड स्टाइल में परोसती है। यहाँ नायक सूरज सिंह (राजेंद्र कुमार) सिर्फ दिल चुराता नहीं, बल्कि राजकुमारी भी चुरा लेता है – वो भी घोड़े पर बैठकर, जैसे हॉलीवुड और राजश्री की फिल्मों में होता है। कथानक: कौन राजकुमार, कौन डाकू? राजकुमार प्रताप की गद्दी पर बैठा है वो, जो असल में संग्राम सिंह का बेटा है! और असली राजकुमारी को डाकू सूरज उठा ले जाता है — बस यहीं से शुरू होती…
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